बौद्ध धार्मिक नेतृत्व श्रीलंका के हालात पर चिंतित

बौद्ध भिक्षु
Image caption फ़ोनसेका और सरकार के समर्थकों के बीच श्रीलंका में झड़पें हुई हैं

श्रीलंका में प्रभावशाली बौद्ध भिक्षुओं ने देश की राजनीतिक स्थित पर चिंता का इज़हार किया है. सिन्हला समुदाय की बहुमत वाले श्रीलंका में अधिकतर लोग बौद्ध धर्म का पालन करते हैं.

देश में पूर्व सेनाध्यक्ष सरथ फ़ोनसेका की विवादित राष्ट्रपति चुनावों में 'हार' और फिर उनकी गिरफ़्तारी के बाद कई दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं.

फ़ोनसेका ने बुधवार को हुई झड़पों के बाद अपने समर्थकों से शांति की अपील की थी. उनकी गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे समर्थकों और सरकार के समर्थकों के बीच बुधवार को झड़पें हुई थीं.

बौद्धों का विशेष सम्मेलन

बौद्ध धार्मिक नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि भविष्य में तबाही हो सकती है और अगले गुरुवार, 18 फ़रवरी को एक विशेष सम्मेलन में लोकतंत्र को 'पुन: स्थापित' करने के लिए क़दमों पर विचार होगा.

बौद्ध नेतृत्व का कहना था, "लोकतंत्र और प्रशासन के बारे में अब अनिश्चितता है और इससे श्रीलंका में भविष्य में तबाही हो सकती है. बौद्ध भिक्षु होने के नाते हम चुप नहीं बैठ सकते हैं. कैंडी शहर में विशेष सम्मेलन होगा ताकि लोकतंत्र और प्रशासन दोबारा स्थापित करने के लिए क़दमों के बारे में चर्चा हो सके."

बीबीसी के कोलंबो संवाददाता का कहना है कि कुछ बौद्ध भिक्षुओं ने सरकार का समर्थन किया है लेकिन अनेक भिक्षु पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल फ़ोनसेका के समर्थन में आगे आए हैं.

श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने उस याचिका पर सुनवाई को मंज़ूरी दे दी है जिसमें जनरल फ़ोनसेका को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया गया है

सुप्रीम कोर्ट के बाहर सैकड़ों वकीलों ने पिछले कुछ दिनों में कई बार मार्च और प्रदर्शन किए हैं और जनरल फ़ोनसेका की रिहाई की माँग की है.

बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेविलैंड के अनुसार राजनीतिक से प्रभावित बौद्ध भिक्षु बंटे हुए नज़र आ रहे हैं.

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