भारत के ख़िलाफ़ सईद की नई मुहिम

प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज़ सईद ने पानी के मुद्दे पर भारत के ख़िलाफ पाकिस्तान में देशव्यापी प्रदर्शन करने की एक मुहिम चलाने का फ़ैसला लिया है.

भारत की ओर से पाकिस्तानी नदियों पर बनाए गए बांध के ख़िलाफ जमात-उद-दावा ने रविवार को लाहौर में पंजाब विधानसभा के बाहर अनूठा विरोध प्रदर्शन किया. इसमें किसान बड़ी संख्या में ट्रेक्टर ले कर आए थे.

इस प्रदर्शन में पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से किसान आए थे जिनके हाथों में प्ले कार्ड थे और इन पर “पानी या जंग”, “पानी या ख़ून”, “कश्मीर आज़ाद करो, पानी बचाओ” और “शांति नहीं पानी चाहिए” जैसे नारे लिखे थे.

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज़ सईद ने कहा, “भारत अवैध रूप से बांध बना कर पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोक रहा है और वह युद्ध चाहता है. पाकिस्तान को चाहिए कि वह उसका मुक़ाबला करे.”

उन्होंने आगे कहा, “कृषि तो दूर की बात है पाकिस्तानी जनता के लिए पीने का पानी भी उपल्बध नहीं है और यह पाकिस्तान के लिए ज़िंदगी और मौत का मसला बना गया है.”

प्रदर्शन

हाफिज़ सईद ने घोषणा की है कि वे भारत के ख़िलाफ देशव्यापी प्रदर्शन करेंगे और इसे लेकर पाकिस्तानी सरकार पर दबाव बनाए रखेंगे.

उन्होंने इस क्षेत्र में शांति का संकल्प लिया और साथ ही यह भी कहा कि भारत पाकिस्तान के ख़िलाफ़ युद्ध चाहता है.

हाफिज़ सईद ने कहा, “मेरा अपराध यह है कि मैंने कश्मीर सहित भारत के उत्पीड़ित लोगों के लिए आवाज़ उठाई. मेरा धर्म कहता है कि मैं भारत के मुसलमानों के लिए भी आवाज़ उठाऊँ.”

संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद ने जमात-उद-दावा के ख़िलाफ तो प्रतिबंध लागू कर दिए थे लेकिन वह विवादास्पद भारतीय परियोजनाओं पर ख़ामोश दिख रही है.

इस प्रदर्शन में हाफिज़ अब्दुर्रहमान मक्की, मौलाना अमीर हमज़ा और मौलाना हसनैन सिद्दीक़ी सहित जमात-उद-दावा और लश्करे तैबा के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया.

प्रदर्शन के बाद एक घोषणा-पत्र जारी किया गया जिसमें काफी सख़्त प्रस्ताव दिए गए और पाकिस्तान सरकार पर दबाव डाला गया कि वह भारत के ख़िलाफ बल प्रयोग के विकल्प का इस्तेमाल करे.

इस प्रदर्शन के दौरान लाहौर के माल रोड को बंद कर दिया गया था और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई थी. मीडिया से कहा गया था कि इस प्रदर्शन की कवरेज के लिए कैमरा इस्तेमाल न किया जाए.

ग़ौरतलब है कि जब भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव दिया था, उसी समय से जमात-उद-दावा खुल कर भारत के ख़िलाफ़ विरोध कर रही है और उसके प्रमुख भी सर्वजानिक स्थानों पर आ कर भाषण देने लगे हैं.

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