'अमरीका आख़िर यहाँ कर क्या रहा है'

महमूद अहमदीनेजाद
Image caption अहमदीनेजाद ने सवाल उठाया कि अमरीका आख़िर उस क्षेत्र में क्या कर रहा है?

ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति सिर्फ़ एक स्थिति में बहाल हो सकती है कि वहाँ से अमरीकी और अन्य विदेशी सेनाएँ तुरंत बाहर निकल जाएँ.

राजधानी काबुल में राष्ट्रपति हामिद करज़ई से मुलाक़ात करने के बाद महमूद अहमदीनेजाद ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को भी संबोधित किया है.

महमूद अहमदीनेजाद की अफ़ग़ान यात्रा को मौजूदा राजनीतिक और कूटनीतिक हालात में बहुत महत्वपूर्ण समझा जा रहा है.

कहने को तो ये संवाददाता सम्मेलन था लेकिन पत्रकारों के साथ ज़्यादातर बातचीत राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने ही की जिसमें उन्होंने तालेबान के ख़िलाफ़ लड़ाई में राष्ट्रपति हामिद करज़ई के सबसे घनिष्ठ मित्र यानी अमरीका पर ज़ुबानी हमला किया.

उन्होंने कहा कि अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में तथाकथित उन्हीं आतंकवादियों के ख़िलाफ़ लड़ाई कर रहा है जिन्हें किसी समय अमरीका का समर्थन हासिल था.

दोहरी चालें

महमूद अहमदीनेजाद ने कहा, "जो लोग आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई की बात करते हैं वो आख़िर सफल क्यों नहीं हो रहे हैं. मैं समझता हूँ कि इस नाकामी की वजह ये है कि वे ख़ुद ही दोहरी चालें चल रहे हैं. ख़ुद उन्होंने ही आतंकवाद शुरू किया और अब वो कह रहे हैं कि वो आतंकवाद से लड़ना चाहते हैं. भला ये कैसे संभव है. वो ऐसा कर ही नहीं पाएंगे."

उनकी इस यात्रा के इस अवसर पर अच्छी ख़ासी मज़ेदार बात ये रही कि उसी समय अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स भी अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा पर थे.

रॉबर्ट गेट्स कुछ दिन पहले आरोप लगा चुके हैं कि ईरान दोहरी चालें चल रहा है.

गेट्स ने कहा था, "एक तरफ़ तो ईरान अफ़ग़ान सरकार के साथ दोस्ताना संबंधों की बात करता है और दूसरी तरफ़ तालेबान को किसी ना किसी रूप में समर्थन भी दे रहा है."

ईरान ने हालाँकि इन आरोपों का खंडन किया है. राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने यहाँ तक कह दिया कि आतंकवाद का मुक़ाबला युद्ध के मैदान में सेनाओं के ज़रिए नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए बहुत ही अक्लमंदी से काम लेना होगा.

उन्होंने एक बार फिर कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की समस्याओं का हाल तभी निकल सकता है जब विदेशी सेनाएँ वहाँ से निकल जाएँ.

संवाददाता सम्मेलन में अहमदीनेजाद ने कई बार राष्ट्रपति हामिद करज़ई की तरफ़ भी देखा और सवाल उठाए कि दुनिया के दूसरे हिस्से में स्थित देश अमरीका इस क्षेत्र में आख़िर कर क्या रहा है.

राष्ट्रपति हामिद करज़ई में इस मौक़े पर ज़्यादा कुछ नहीं कहा लेकिन समर्थन और सहायता के लिए राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का शुक्रिया अदा ज़रूर किया.

साथ ही उन्होंने ईरान को एक यथार्थवादी मित्र देश क़रार दिया.

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