अमरीकी नागरिकों पर आतंक के आरोप

सरगोधा गिरफ़्तारियाँ
Image caption इन अमरीकी नागरिकों का कहना है कि वे चैरिटी काम के लिए आए थे

पाकिस्तान में कुछ महीने पहले चरमपंथी हमलों की साज़िश रचने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए पाँच अमरीकी नागरिकों पर आतंकवाद के आरोप लगाए गए हैं.

पाँच अमरीकियों के वकील ने जानकारी दी है कि इनकी उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच है और सरगोधा की एक जेल में ही बनाई गई एक अदालत में ये आरोप निर्धारित किए गए हैं.

इन पर आरोप है कि ये लोग दिसंबर 2009 में अल क़ायदा से संबंधित कुछ गुटों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे थे कि तभी इन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था.

इन पाँचों लोगों ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है.

अधिकारियों ने कहा है कि इन पाँचों युवकों ने अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई में तालेबान का साथ देने के लिए वहाँ जाने की भी योजना बनाई थी.

लेकिन इन सभी युवाओं ने अल क़ायदा के साथ अपना कोई भी संबंध होने से इनकार किया है और उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान में चैरिटी यानी कल्याणकारी कार्यों के लिए जाना चाहते थे.

इन पाँच युवकों में से दो पाकिस्तानी मूल के अमरीकी हैं जबकि बाक़ी तीन के बारे में कहा गया है कि एक इरीट्रिया का, एक इथियोपिया का और एक मिस्र मूल का है. ये सभी अमरीकी नागरिक हैं और इन सभी के पास अमरीकी पासपोर्ट थे.

आरोप-प्रत्यारोप

अगर आरोप साबित हो जाते हैं तो इन्हें आजीवन कारावास की सज़ा भी हो सकती है. पाकिस्तान ने इन अमरीकी नागरिकों को अमरीका जाने से रोक दिया था.

इन पाँचों अमरीकी युवाओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस हिरासत के दौरान उन्हें प्रताड़ित किया गया है और यह प्रताड़ना अमरीकी अधिकारियों के निर्देशों पर हुई है. लेकिन जेल अधिकारियों ने प्रताड़ना के इन आरोपों का खंडन किया.

इस्लामाबाद में अमरीकी दूतावास ने पुष्टि की है कि बुधवार को अदालत में हुई सुनवाई के दौरान एक अमरीकी दूत भी मौजूद था. अमरीकी दूतावास ने इन आरोपों को ग़लत बताया है कि इन पाँचों अमरीकी युवाओं को प्रताड़ित किया गया है.

Image caption इनमें दो पाकिस्तानी मूल के अमरीकी नागरिक भी शामिल हैं

बुधवार को अदालती सुनवाई के दौरान पत्रकारों को अंदर नहीं जाने दिया गया था लेकिन समाचार एजेंसी एएफ़पी ने ख़बर दी है कि इन पाँचों युवाओं के वकील शाहिद कमाल ने बाद में पत्रकारों को बताया कि सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोप निर्धारित कर दिए गए हैं.

वकील शाहिद कमाल ने कहा, "ये सभी आरोप आतंकवाद से संबंधित हैं और ये आरोप अगर साबित होते हैं तो इनके लिए उम्रक़ैद की सज़ा का प्रावधान है. सभी अभियुक्तों ने एक साथ इन आरोपों को ख़ारिज किया है."

इन पाँच अमरीकी युवाओं के बारे में कहा जाता है कि वो नवंबर 2009 में अमरीका के वर्जीनिया राज्य से अचानक लापता हो गए थे.

उनके परिवारों ने इन पाँचों युवाओं को लापता क़रार दे दिया था. पुलिस और अभियोजक पक्ष ने आरोप लगाए हैं कि ये पाँचों युवा पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में हमले करने की योजना बना रहे थे और इसके लिए उन्होंने चरमपंथियों के साथ संपर्क साधने की कोशिश भी की थी.

इस मुक़दमे की अगली सुनवाई 31 मार्च को निर्धारित की गई है जिस दौरान संभावना है कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करेगा.

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