पाकिस्तान के हिंदू सांसद अब नाराज़ नहीं

पाकिस्तान के हिंदू सांसदों ने लाहौर हाई कोर्ट की उस टिप्पणी पर संतोष जताया है जिसमें अदालत ने कथित हिंदू विरोधी बयान पर स्पष्टीकरण दिया है.

दरअसल कुछ दिन पहले पाकिस्तानी अख़बारों में ये ख़बर छपी थी कि लाहौर हाई कोर्ट के एक जज ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ‘देश में धमाके तो मुसलमान कर रहे हैं लेकिन उन्हें धन हिंदू दे रहे हैं.’

इस ख़बर को लेकर कई पाकिस्तानी सांसदों ने संसद के सत्र का बहिष्कार कर दिया था.

सांसदों के विरोध के बाद बुधवार को लाहौर हाई कोर्ट ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस टिप्पणी का खंडन किया था.

अदालत के बयान में कहा गया है कि कुछ समाचार पत्रों में हिंदू समुदाय के बारे में जो कुछ लिखा गया वह अदालत की टिप्पणी के विपरीत है.

बयान के अनुसार अदालत ने ऐसी टिप्पणी नहीं की है और कुछ समाचार पत्रों ने उसे ग़लत ढंग से छापा है. साथ ही कहा गया है कि अदालत को इस बात से खेद हुआ है.

मुस्लिम लीग नवाज़ के सांसद डॉक्टर दर्शन लाल ने बीबीसी को बताया, “हमने लाहौर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश की टिप्पणी का विरोध किया था क्योंकि इसे हमारी भावनाएँ आहत हुई थी. लेकिन अब अदालत ने इसका खंडन किया है और कहा है कि कुछ समाचार पत्रों ने ग़लत ख़बर छापी. जब अदालत ने खंडन कर दिया तो बात ख़त्म हो गई.”

हिंदू सांसदो का विरोध

मंगलवार को पाकिस्तानी संसद में अख़बार में छपी ख़बर को लेकर हंगामा हो गया था.

सत्तारूढ़ दल पीपुल्स पार्टी के सांसद डॉक्टर रमेश लाल ने संसद में कहा था कि लाहौर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस ख़्वाजा शरीफ़ ने अपनी टिप्पणी में पाकिस्तान के हिंदू समुदाय पर आरोप लगाया है कि वे आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए लोगों को धन दे रहे हैं.

संसद में बोलते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी से इस मामले में अपने आप संज्ञान लेने की मांग की थी. डॉक्टर रमेश लाल ने कहा था अदालत की टिप्पणी से देश के तीस लाख हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं.

डॉक्टर रमेश लाल का कहना था कि हिंदू देशभक्त है और अख़बारों में इस प्रकार के समाचार राष्ट्रीय एकता के लिए भी हानिकारक है.

बाद में उन्होंने संसद सत्र का बहिष्कार किया था जिसमें सत्तारूढ़ दल, मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट, आवामी नेशनल पार्टी और विपक्षी दल मुस्लिम लीग नवाज़ के सांसदों ने भाग लिया था. इसमें आवामी नेशनल पार्टी एक मुस्लिम महिला सांसद भी शामिल थी.

लाहौर हाई कोर्ट में मंगलवार को कुछ गिरफ्तार चरमपंथियों के प्रत्यर्पण के ख़िलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हो रही थी.

उस दौरान मुख्य न्यायधीश जस्टिस ख़्वाजा शरीफ ने कुछ टिप्पणी की थी जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था.

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