कसाब का बयान इस्तेमाल न हो: लखवी

मुंबई
Image caption मुंबई हमलों के मामले में लखवी के ख़िलाफ़ मुकदमा चल रहा है.

पाकिस्तान में मुंबई हमलों के मुक़दमे का सामना कर रहे लश्करे तैबा के नेता ज़की-उर-रहमान लखवी ने अदालत में याचिका दायर कर अपील की है कि अजमल क़साब का अदालती बयान उनके ख़िलाफ चले रहे मुक़दमे में इस्तेमाल न किया जाए.

ज़की-उर-रहमान लखवी के वकील ख़्वाजा सुलतान ने सुप्रीम कोर्ट में उनकी ओर से याचिका दायर की जिस में अदालत से आग्रह किया गया है कि अजमल आमिर कसाब ने जो बयान भारतीय अधिकारियों को दिया है उसे रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधक अदालत में चल रहे मुक़दमे में इस्तेमाल न किया जाए.

सुलतान ख़्वाजा के अनुसार अभियोजन पक्ष ने स्पष्ट रूप से उनके मुव्वकिल के ख़िलाफ़ अभी तक कोई आरोप नहीं लगाए हैं कि वो मुंबई हमलों में लिप्त थे या उन्होंने हमलावरों की मदद की.

उन्होंने बताया, “इस मामले की जाँच केवल अजमल क़साब के बयान पर आधारित है और वो भारतीय जेल में क़ैद हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “अभियोजन पक्ष ने मेरे मुव्वकिल के ख़िलाफ तीन आरोप-पत्र दाख़िल किए हैं जिसमें उनके लिप्त होने के कोई प्रमाण नहीं हैं और न ही इस बात के सबूत हैं कि उन्होंने हमलावरों को प्रशिक्षण दिया.”

ख़्वाजा सुलतान के मुताबिक़ अजमल आमिर क़साब का बयान पाकिस्तान की अदालत में इस्तेमाल नहीं हो सकता क्योंकि उन्होंने यह बयान भारतीय अधिकारियों को दिया है.

उन्होंने कहा कि यह बयान उसी स्थिति में इस्तेमाल हो सकता है जब वो हमले में कसाब के साथ होते.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक़ ज़की-उर-लखवी का वकील मुंबई हमलों के मुक़दमे में ग़ैर ज़रूरी रुकावटें खड़ी कर रहा है, उनकी याचिकाओं से सुनवाई में बाधा आ रही है.

ग़ौरतलब है कि रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधक अदालत में ज़की-उर-रहमान लखवी, ज़रार शाह, अबू अल-क़ामा, हामिद अमीन सादिक़, शाहिद जमील रियाज़, जमील अहमद और यूनुस अंजुम के ख़िलाफ मुक़मदा चल रहा है.

अभियुक्तों पर आरोप है कि उन्हों ने 2008 में हुए मुँबई हमलों के दारौन हमलावरों की मदद की और उन्हें प्रशिक्षण दिया.

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