श्रीलंका में राजपक्षे की पार्टी आगे

मतदान करते राजपक्षे और उनकी पत्नी

श्रीलंका में हुए संसदीय चुनावों के नतीजों के शुरुआती रुझानों में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की सत्ताधारी पार्टी बिखरे हुए विपक्ष से स्पष्ट तौर पर आगे चल रही है.

बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेविलैंड के अनुसार तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के ध्वस्त हो जाने के बाद पहली बार हुए संसदीय चुनावों में गुरुवार को लगभग 50 प्रतिशत मतदान हुआ था.

श्रीलंका की संसद में 225 सदस्य हैं और सत्ताधारी पार्टी को पिछली संसद में अन्य दलों से निकले लोगों के समर्थन के साथ कुल 126 सदस्यों का समर्थन हासिल था.

इससे पहले श्रीलंका के संसदीय चुनावों में सबसे कम मतदान 1989 में तमिल विद्रोहियों की हिंसा के बीच हुए चुनावों में रहा था. तब 63 प्रतिशत मतदान हुआ था.

फ़िलहाल लगभग बीस प्रतिशत वोटों की गिनती हुई है.

फ़ोनसेका बहुत पीछे

अब तक जितने मतों की गिनती हुई है, उनमें से राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के यूनाइटेड पीपुल्स फ़्रीडम एलायंस को 62 प्रतिशत, विपक्षी यूनाइटेड नेशनल पार्टी को 27 प्रतिशत और पूर्व सेनाध्यक्ष सरथ फोनसेका की वामपंथी रुझान वाले नेशनल एलायंस को मात्र पाँच प्रतिशत वोट मिले हैं.

सरकार में यातायात मंत्री दुल्लास अलाहापेरुमा का दावा था, "आ रहे नतीजों से पता चलता है कि जनता ने राष्ट्रपति के कार्यक्रमों का अनुमोदन किया है...हमें कम से कम 138 सीटें मिलेंगी."

मतदान में गिरावट का कारण बताते हुए मंत्री ने कहा, "विपक्ष अपने मतदाताओं को मतदान केंद्रो तक नहीं ले जा पाया. पहले से ही स्पष्ट था कि सरकार जीत सकती है इसलिए हमारे समर्थक भी उतनी गिनती में बाहर नहीं निकले."

उधर बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेविलैंड के मुताबिक एक स्वतंत्र संस्था कैंमपेन फ़ॉर फ़्री एंड फ़ेयर इलेक्शन्स ने कहा है कि चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं था और देश के उत्तरी भाग में तमिल शर्णार्थी मतदान में भाग नहीं ले पाए क्योंकि पहचान के दस्तावेज़ों के बारे में स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किए गए थे.

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