राजपक्षे की पार्टी को बहुमत

राजपक्षे की सत्ता पर पकड़ लगातार मज़बूत होती जा रही है

श्रीलंका में आम चुनाव के नतीजे आने के बाद स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भारी जीत हासिल की है.

श्रीलंका के लोकतांत्रिक इतिहास में 1977 के बाद पहली बार किसी दल को इतना बड़ा बहुमत हासिल हुआ है, हालाँकि इस बार के चुनाव में सबसे कम मतदाताओं ने वोट डाला था.

देश के कुछ हिस्सों में दोबारा मतदान कराए जाने के बाद चुनाव परिणामों की घोषणा की गई है, हिंसा की घटनाओं की वजह से दोबारा मतदान कराया गया था.

225 सीटों वाली संसद में राजपक्षे के नेतृत्व वाले गठबंधन को 144 सीटें मिली हैं. विपक्षी के हाथ सिर्फ़ 60 सीटें लगी हैं.

राष्ट्रपति राजपक्षे को चुनौती देने वाले पूर्व जनरल सरत फोनसेका की पार्टी ने कुल सात सीटें जीती हैं जिनमें जनरल फोनसेका भी शामिल हैं.

जनरल फोनेसका ने तमिल विद्रोहियों के खिलाफ़ सैनिक अभियान का नेतृत्व किया था, उन्होंने श्रीलंका की राजपक्षे सरकार की नीतियों को चुनौती देते हुए चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया.

जनरल फोनसेका पर सैनिक अदालत में मुकदमा चल रहा है और वे जेल में बंद हैं.

महिंदा राजपक्षे सिंहला बहुल ग्रामीण इलाक़ों में बहुत लोकप्रिय हैं. उन्होंने मतदाताओं से वादा किया था कि चुनाव जीतने के बाद वे श्रीलंका को "प्रगति के रास्ते पर ले जाएँगे."

राजपक्षे 2016 तक सत्ता में रहेंगे और अगर उन्हें सिर्फ़ छह और सासंदों का समर्थन मिल जाता है तो वे देश के संविधान तक में फेरबदल कर सकते हैं.

राजपक्षे पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और प्रेस की स्वतंत्रता को बाधित करने के आरोप लगे हैं लेकिन वे इन आरोपों को ग़लत बताते रहे हैं.

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