घरेलू कामकाजी महिलाएं जुड़ेंगी व्यापार संघ से

सबाह की कोशिश
Image caption पाकिस्तान में सबाह काफ़ी कामयाब रहा है.

सार्क संगठन ने दक्षिण एशियाई क्षेत्र की महिलाओं को ग़रीबी से निकालने के लिए एक नई पहल के तहत घरेलू महिला कामगारों को सीधे व्यापार संघ से जोड़ने की बात कही है.

सार्क विकास कोष की इस पहली परियोजना से जुड़ी महिलाएं ख़ुद ही इस परियोजना का प्रारुप लेकर थिम्पू पहुंची हैं.

भारत के गुजरात से हो या पाकिस्तान के हरिपुर से या फिर थिम्पू से ही, इन सभी महिलाओं की कहानी एक जैसी है. घर में रह कर वो अपना काम करती हैं. सिलाई, कढ़ाई और बुनाई या फिर चटनी पापड़ बनाने का काम करती हैं. सब की शिकायत एक ही कि मेहनत बहुत करती हैं पर कमाई संतोषजनक नहीं.

भारत की स्वयंसेवी संगठनों 'सेवा' और 'होमनेट' के सहयोग से इन्हीं सब मसलों को सुलझाने की कोशिश हो रही है.

सबाह की सफलता

'सेवा' की रेहाना झाबवाला कहती हैं, "हमारे देश में घरों में काम कर गुज़र बसर करने वाली महिलाओं की संख्या पांच करोड़ तक होगी. ये ग़रीब हैं और दिखाई भी नहीं देतीं. इनके काम को कोई पहचान नहीं मिलती और आमदनी भी कम है, क्योंकि वो सीधे बाज़ार तक नहीं जा सकतीं."

इसी समस्या को ध्यान में रख कर ये मुहिम शुरू की गई है. पाकिस्तान की गुलशन बीबी कढ़ाई की अपनी विरासत इसलिए आगे बढ़ा पा रही हैं, क्योंकि उन्हें मेहनत की अच्छी क़ीमत मिल रही है.

गुलशन कहती हैं कि वे पाकिस्तान के घरेलू कामगारों के व्यापार संघ 'सबाह' की शेयर होल्डर हैं और उन्हें एक कुर्ते की कढ़ाई के लिए दस हज़ार रुपए तक मिल जाते हैं.

'सेवा' ने भारत के बाज़ार तक कारीगरों के सामान पहुंचाने, उन्हें अच्छे दाम दिलवाने और उनके सामान को फैशनेबल बनाने के मॉडल तैयार किए हैं.

Image caption सबाह की मुहिम के तहत महिलाओं को सीधे बाज़ार से जोड़ने पर ज़ोर है

मालदीव की एलीज़ाबेथ मक्का के आटे से फूल बनाती हैं और पेंटिग भी करती हैं. उनका देश छोटा सा है, बाज़ार छोटा और कच्चा माल भी आयात करना पड़ता है, उन्हें सबाह से बहुत आशाएं है.

वहीं नेपाल की लीना श्रेष्ठ अपना घरेलू काम छोड़ने का मन बना चुकी थीं क्योंकि बिचौलिए अमीर हो रहे थे और उनकी मुश्किले बढ़ती जा रही थी. पर अब उन्हें एक बेहतर भविष्य की आशा है और उन्हें लगता है कि उन जैसी अबलाओं को ये पहल सबला बनाएगी.

नेपाल का सबाह इस साल एक हज़ार सदस्य जोड़ना चाहता है तो पाकिस्तान 15 सौ, साथ ही परियोजना का फ़ायदा उठाने की क़तार में मालदीव, भूटान और अफ़ग़ानिस्तान खड़े हैं. तो, शायद वो दिन दूर नहीं जब दक्षिण एशिया का विशेष ब्रांड बन 'सबाह' उभरे और धूम मचाए.

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