प्रधानमंत्री का पद छोड़ने से इनकार

माधव कुमार नेपाल
Image caption माधव कुमार नेपाल पर पद छोड़ने का दबाव है

माओवादियों के विशाल प्रदर्शन के बावजूद नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया है.

टेलीविज़न पर अपने संबोधन में उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे सहमति के लिए बातचीत जारी रखें.

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं माओवादियों से अपील करता हूँ कि वे आम हड़ताल की अपील वापस ले लें. देश को पूरी तरह बंद करना समस्या का समाधान नहीं."

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विरोधी सरकार गिराना चाहते हैं.

नेपाल की संसद में माओवादी सबसे बड़ी पार्टी हैं. माओवादी राष्ट्रीय एकता वाली सरकार का नेतृत्व करना चाहते हैं.

चेतावनी

मज़दूर दिवस के मौक़े पर आयोजित विशाल प्रदर्शन में माओवादियों ने आम हड़ताल की चेतावनी दी है.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि नए घटनाक्रम से शांति प्रक्रिया ख़तरे में आ सकती है.

शनिवार को माओवादियों की विशाल रैली में माओवादी नेता प्रचंड ने कहा कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई, तो रविवार से आम हड़ताल होगी.

उन्होंने कहा, "हम ये फ़ैसला करने पर मजबूर हुए हैं क्योंकि सरकार न तो शांति प्रक्रिया को लेकर गंभीर है और न ही संविधान बनाने को लेकर."

पिछले सप्ताह प्रचंड ने कहा कि उनके पास सरकार पर दबाव बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है क्योंकि सरकार नए संविधान बनाने की 28 मई की समयसीमा को लेकर गंभीर नहीं है.

माओवादियों का कहना है कि मौजूदा सरकार को आम जनता का समर्थन नहीं. पार्टी राष्ट्रीय एकता वाली सरकार के पक्ष में है.

मज़दूर दिवस के मौक़े पर माओवादियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. लाल झंडा लिए बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए.

सुरक्षा कड़ी

समाचार एजेंसी एएफ़पी ने पुलिस के हवाले से बताया है कि सिर्फ़ डेढ़ लाख प्रदर्शनकारी ही वहाँ मौजूद थे, जबकि माओवादियों ने छह लाख प्रदर्शनकारियों के आने की बात कही थी.

Image caption माओवादियों ने विशाल रैली की है

सुरक्षाकर्मियों को चौकस रहने को कहा गया है और राजधानी काठमांडू की सड़कों पर 15 हज़ार सुरक्षाकर्मी गश्त लगा रहे हैं. अभी तक कहीं से हिंसा का कोई समाचार नहीं है.

वर्ष 2006 में माओवादी अपना आंदोलन ख़त्म करके राजनीति की मुख्यधारी में शामिल हुए थे. मौजूदा संसद में उनके पास सबसे ज़्यादा सीटें हैं.

लेकिन एक साल पहले सेनाध्यक्ष को हटाने के मुद्दे पर राष्ट्रपति और उस समय के प्रधानमंत्री प्रचंड के बीच मतभेद हो गए थे.

जिसके बाद प्रचंड ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था.

संबंधित समाचार