नेपाल में माओवादियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

प्रदर्शन

नेपाल में माओवादियों ने रविवार से प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के इस्तीफ़े की माँग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है.

माओवादी नेताओं का कहना है कि वो राजधानी काठमांडू में सड़कों की घेराबंदी कर रहे हैं और केवल एंबुलेंस, कूड़ा इकट्ठा करने वाले वाहनों और पत्रकारों को आने जाने देंगे.

उन्होंने घोषणा की है कि इस नाकेबंदी में दो घंटे की छूट दी जाएगी ताकि लोग खाने पीने का सामान ख़रीद सकें.

दूसरी ओर नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया है.

टेलीविज़न पर अपने संबोधन में उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की अपील की.

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं माओवादियों से अपील करता हूँ कि वे आम हड़ताल की अपील वापस ले लें. देश को पूरी तरह बंद करना समस्या का समाधान नहीं."

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विरोधी सरकार गिराना चाहते हैं.

नेपाल की संसद में माओवादी सबसे बड़ी पार्टी हैं. माओवादी राष्ट्रीय एकता वाली सरकार का नेतृत्व करना चाहते हैं.

माओवादी की चेतावनी

शनिवार को एक रैली में माओवादी नेता प्रचंड ने कहा, "हम ये फ़ैसला करने पर मजबूर हुए हैं क्योंकि सरकार न तो शांति प्रक्रिया को लेकर गंभीर है और न ही संविधान बनाने को लेकर."

पिछले सप्ताह प्रचंड ने कहा कि उनके पास सरकार पर दबाव बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है क्योंकि सरकार नए संविधान बनाने की 28 मई की समयसीमा को लेकर गंभीर नहीं है.

माओवादियों का कहना है कि मौजूदा सरकार को आम जनता का समर्थन हासिल नहीं है. पार्टी राष्ट्रीय एकता वाली सरकार के पक्ष में है.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि नए घटनाक्रम से शांति प्रक्रिया ख़तरे में आ सकती है.

सुरक्षा कड़ी

माओवादियों के बंद को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों को चौकस रहने को कहा गया है और राजधानी काठमांडू की सड़कों पर 15 हज़ार सुरक्षाकर्मी गश्त लगा रहे हैं.

अभी तक कहीं से हिंसा का कोई समाचार नहीं है.

वर्ष 2006 में माओवादी अपना आंदोलन ख़त्म करके राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हुए थे. मौजूदा संसद में उनके पास सबसे ज़्यादा सीटें हैं.

लेकिन एक साल पहले सेनाध्यक्ष को हटाने के मुद्दे पर राष्ट्रपति और उस समय के प्रधानमंत्री प्रचंड के बीच मतभेद हो गए थे.

इसके बाद प्रचंड ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था.

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