नेपाल में देशव्यापी हड़ताल जारी

नेपाल में माओवादियों का हड़ताल
Image caption नेपाल में हड़ताल के चौथे दिन बुधवार को भी आम जनजीवन अस्तव्यस्त है

नेपाल में माओवादियों के अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल के चौथे दिन राजधानी काठमांडू में इसका ख़ासा प्रभाव देखा जा रहा है.

बुधवार को हड़तालरत माओवादियों ने काठमांडू में प्रमुख सरकारी कार्यलयों को जाने वाली सड़कों की घेराबंदी की और रुकावटें डालीं.

हड़ताल के कारण राजधानी में आम जनजीवन अस्तव्यस्त है और सड़कों पर यातयात कम दिख रहे हैं.

विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी यूनाईटेड माओवादी-लेनिनवादी (यूएमएल) प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

ख़बरें हैं कि माओवादी इस अनिश्चितकालीन हड़ताल को और अधिक प्रभावशाली बनाने की कोशिश में हैं.

लेकिन बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि आम लोगों में इससे ऊब चुके नज़र आ रहे हैं, क्योंकि हड़ताल की वजह से स्कूल बंद हैं जबकि व्यापार और यातायात बुरी तरह से प्रभावित है.

माओवादियों के हड़ताल के बीच सुरक्षाकर्मियों को चौकस रहने को कहा गया है.

कोई रास्ता नहीं

शनिवार को माओवादी नेता प्रचंड ने एक रैली में कहा था कि उनके पास सरकार पर दबाव बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है, क्योंकि सरकार नए संविधान बनाने की 28 मई की समय सीमा को लेकर गंभीर नहीं है.

नेपाल की संसद में माओवादी सबसे बड़ी पार्टी हैं और उनकी मांग है कि उनके नेतृत्व में नेपाल में राष्ट्रीय एकता की सरकार का गठन हो.

माओवादियों का कहना है कि मौजूदा सरकार को आम जनता का समर्थन हासिल नहीं है.

वर्ष 2006 में माओवादी अपना आंदोलन ख़त्म करके राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हुए थे. लेकिन एक साल पहले सेनाध्यक्ष को हटाने के मुद्दे पर राष्ट्रपति और उस समय के प्रधानमंत्री प्रचंड के बीच मतभेद हो गए थे.

इसके बाद प्रचंड ने प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था.

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