नेपाल में हड़ताल के दौरान झड़पें

नेपाल में माओवादियों की  हड़ताल

नेपाल में देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे माओवादी समर्थकों और हड़ताल का विरोध कर रहे स्थानीय लोगों के बीच झड़पें हुई हैं.

हड़ताल का विरोध कर रहे लोग अपनी दुकानें खोलकर कामकाज शुरु करना चाहते थे.

झड़पों में लगी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का प्रयोग भी करना पड़ा.

गुरुवार को माओवादियों की हड़ताल का पाँचवा दिन था.

राजधानी काठमांडू सहित देश के कई हिस्सों में इसका ख़ासा असर दिख रहा है और जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है.

हड़ताल कर रहे माओवादी सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी यूनाईटेड माओवादी-लेनिनवादी (यूएमएल) के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

उनका कहना है कि माओवादियों के नेतृत्व में एक राष्ट्रीय सहमति की सरकार का गठ न होना चाहिए.

हड़ताल

संवाददाताओं का कहना है कि काठमांडू में हुई झड़प इस बात का संकेत हैं कि हड़ताल से स्थानीय लोगों को बहुत परेशानी हो रही है और वे इससे उकता चुके हैं.

सड़कें जाम कर दी गई हैं और इसकी वजह से ट्रकें शहर के भीतर नहीं घुस पा रही हैं.

इसके कारण काठमांडू में खाने-पीने के सामान की कमी होने लगी है.

इस हड़ताल की शुरुआत शनिवार को हुई थी.

उस दिन काठमांडू में एक बड़ी रैली करने के बाद माओवादियों ने कहा था कि यदि सरकार के गठन को लेकर कोई फ़ैसला नहीं होता है तो माओवादी देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे.

वर्ष 2006 में माओवादी अपना आंदोलन ख़त्म करके राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हुए थे और संविधान सभा के लिए हुए चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरे थे.

माओवादी नेता पुष्पकमल दहाल प्रचंड प्रधानमंत्री भी बने लेकिन एक साल पहले सेनाध्यक्ष को हटाने के मुद्दे पर राष्ट्रपति और उस समय के प्रधानमंत्री प्रचंड के बीच मतभेद हो गए थे.

इसके बाद प्रचंड ने प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था.

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