'कोई युद्ध अपराध नहीं हुआ'

फ़ोनसेका
Image caption फ़ोनसेका संसद के सदस्य हैं लेकिन हिरासत में हैं

श्रीलंका में विपक्षी नेता और तमिल विद्रोदियों के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई के समय सेनाध्यक्ष रहे जनरल सरत फ़ोनसेका ने इन आरोपों का खंडन किया है कि जानबूझकर आम नागरिकों को गोलाबारी का निशाना बनाया गया.

एक प्रतिष्ठित संगठन इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप ने कहा है कि पूर्व सेनाध्यक्ष सरत फोनसेका और रक्षा सचिव गोटाभया राजपक्षे के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धापराधों की जाँच होनी चाहिए, गोटाभया राजपक्षे राष्ट्रपति के भाई हैं.

सरत फोनसेका सांसद हैं और उन्हें संसद में आने की छूट है, बाक़ी समय वे हिरासत में रहते हैं. संसद में ही आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने ज़ोरदार शब्दों में इन आरोपों को ग़लत बताया कि जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बनाया गया था.

उन्होंने कहा, "अगर कोई ये कहता है कि हमने आम नागरिकों को मारने के लिए जानबूझकर गोलाबारी की है तो मैं इसका खंडन करूँगा. हमें अपने बहुत सारे सैनिक गँवाने पड़े क्योंकि हम आम नागरिकों को बचाने के लिए बहुत सारे प्रयास कर रहे थे. मेरी जानकारी में कहीं कोई युद्ध अपराध नहीं हुआ है और ज्यादातर आरोप बेबुनियाद हैं."

राष्ट्रपति चुनाव में महिंदा राजपक्षे के ख़िलाफ़ उम्मीदवार रहे सरत फोनसेका को चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद ही गिरफ़्तार कर लिया गया था.

जनरल सरत फोनसेका के संबंध राष्ट्रपति राजपक्षे के साथ तब से बिगड़ने शुरू हुए जब जनरल फोनसेका ने राजनीति में सक्रिय दिलचस्पी लेनी शुरू की.

श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ हुई लड़ाई में आम नागरिकों को प्रताड़ित किए जाने और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप कई बार अलग-अलग संस्थाओं ने लगाए हैं जिनसे श्रीलंका की सरकार इनकार करती रही है.

श्रीलंका सरकार के एक प्रवक्ता ने भी इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के आरोपों को ग़लत ठहराया है और कहा है कि सेना ने कहीं भी आम नागरिकों पर गोलाबारी नहीं की. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाँच की माँग को डॉक्टर पालिता कोहाना ने साम्राज्यवादी मानसिकता क़रार दिया.

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की अध्यक्ष लुई आर्बर का कहना है कि श्रीलंका की सेना ने आम नागरिकों और हथियारबंद विद्रोहियों के बीच अंतर करने के लिए कोई ख़ास क़दम नहीं उठाया, उन्होंने तमिल विद्रोहियों की भी आलोचना की कि उन्होंने आम जनता को ढाल की तरह इस्तेमाल किया.

युद्ध अपराध के ये आरोप ऐसे समय पर लगे हैं जबकि श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ जीत को एक वर्ष पूरे हो रहे हैं. देश में भारी बारिश के कारण कई बड़े कार्यक्रम रद्द करने पड़े हैं.

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