पाकिस्तान में फ़ेसबुक से प्रतिबंध हटेगा

फ़ेसबुक पर पैगंबर मोहम्मद साहब के कार्टून छपने पर पाकिस्तान में विवाद उठा था
Image caption फ़ेसबुक पर पैगंबर मोहम्मद साहब के कार्टून छपने पर पाकिस्तान में विवाद उठा था

पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक ने कहा है कि फेसबुक और यू ट्यूब वेबसाइटों पर देश में लगा प्रतिबंध अगले कुछ दिनों में हटा लिया जाएगा.

फ़ेसबुक को इस्तेमाल करने वाले किसी व्यक्ति ने पिछले सप्ताह जब पैगंबर मौहम्मद साहब की तस्वीरें आमंत्रित की थीं, तो पाकिस्तान में लोगों में ख़ासी नाराज़गी बढ़ गई थी.

जिसके बाद लाहौर हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद फ़ेसबुक और यू ट्यूब पर प्रतिबंध लगा दिया था.

रहमान मलिक ने अब कहा है कि इन वेबसाइटों के जिन पन्नों पर पैगंबर मोहम्मद साहब के बारे में आपत्तिजनक सामग्री है, उन पर प्रतिबंध तो रहना चाहिए लेकिन पूरी वेबसाइटों को देखने पर प्रतिबंध उचित नहीं है.

प्रतिबंध

रहमान मलिक ने बुधवार को कहा, "हमने इस मुद्दे पर आज कैबिनेट की बैठक में चर्चा की है. मैंने सहयोगी मंत्रियों से कहा कि वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है. मैंने कहा कि वेबसाइटों के जिन पन्नों पर पैगंबर मोहम्मद साहब के बारे में अपमानजनक सामग्री है, सिर्फ़ उन पर ही प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, ना कि पूरी वेबसाइटों पर."

रहमान मलिक ने कहा कि अगले कुछ दिनों के भीतर फ़ेसबुक और यू ट्यूब वेबसाइटों पर से प्रतिबंध हटा लिया जाएगा.

बाद में एक सरकारी वक्तव्य में कहा गया कि मंत्रिमंडल ने पैगंबर के कार्टून बनाने की कोशिशों की कड़े शब्दों में निंदा की और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय को आदेश दिया कि इस तरह की सामग्री पाकिस्तान में इंटरनेट पर दोबारा उपलब्ध ना हो सके.

लाहौर हाई कोर्ट ने गत सप्ताह एक याचिका की सुनवाई के बाद सोशल नेटवर्किंग वेबसाईट फ़ेसबुक पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था.

बाद में पाकिस्तान में इंटरनेट की निगरानी करने वाली संस्था पाकिस्तान टेलीकम्यूनिकेशन अथॉर्टी यानी दूरसंचार प्राधिकरण की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था है कि फ़ेसबुक की तरह यूट्यूब पर भी पैग़म्बर मोहम्मद की अपमानजनक सामग्री है.

बयान में यह भी बताया गया था कि यूट्यूब के कई ऐसे पन्ने हैं जिन पर पैग़म्बर मोहम्मद की तस्वीरें हैं इसलिए किसी एक पन्ने को बंद करने के बजाए पूरी वेबसाईट को बंद कर दिया गया.

पाकिस्तान टेलीकम्यूनिकेशन के अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान के संविधान में भी इस बात का उल्लेख है.

तस्वीरों का विवाद

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा था कि फ़ेसबुक ने पैगम्बर मोहम्मद की तस्वीरें बनाने की एक प्रतियोगिता का आयोजन किया. याद रहे कि पैग़म्बर मोहम्मद के चित्र बनाना या प्रकाशित करना इस्लामी सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है.

Image caption पैगंबर मोहम्मद साहब की तस्वीर या कार्टून बनाना इस्लामी सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है.

अदालत ने पाकिस्तान टेलीकॉम्यूनिकेशन अथॉरिटी को आदेश दिया था कि फ़ेसबुक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाए और अगली सुनवाई में इसके बारे में लिखित जवाब पेश करें.

पाकिस्तान टेलीकॉम्यूनिकेशन के अधिकारियों ने अदालत को बताया था कि फ़ेसबुक के उन हिस्सों को बंद किया गया है जिन पर पैगम्बर मोहम्मद की तस्वीर बनाने की प्रतियोगिता हो रही है.

पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में फ़ेसबुक और यू-ट्यूब के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए थे.

जमातुद-दावा ने कराची में प्रेस के सामने उन वेबसाईटों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया जिन पर पैगम्बर मोहम्मद की तस्वीर छापी गई थी.

प्रदर्शनकारियों की सरकार से ये मांग थी कि इंटरनेट पर उस समग्री को तुरंत बंद किया जाए जहां पैगम्बर मोहम्मद की तस्वीरें प्रकाशित हुई हैं.

इस्लामाबाद स्थित स्वीडन का दूतावास भी कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया था.

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