श्रीलंका पर निष्पक्ष जांच की मांग

नवी पिल्ले
Image caption संयुक्त राष्ट्र का मानवाधिकार विभाग श्रीलंका मामले में सक्रिय रहा है

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मामलों की उच्चायुक्त नावी पिल्लै ने श्रीलंका के बारे में निष्पक्ष जांच की मांग की है.

पिल्लै ने कहा है कि एक निष्पक्ष और जवाबदेह जांच के ज़रिए ही बेहतर ढंग से न्याय दिलाया जा सकता है.

अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक 'इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप' की रिपोर्ट के बाद से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का दबाव बढ़ने लगा है.

क्राइसिस ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि श्रीलंकाई गृह युद्ध में सरकारी फ़ौजियों के ज़रिए युद्ध के अंतिम चरण में आम तमिल नागरिक मारे गए थे और ये युद्धापराध में शामिल है.

नावी पिल्ले ने कहा, "पिछले अनुभव और ताज़ा जानकारियों के मद्देनज़र मैं इस बात से पूरी तरह से निश्चिंत हूं कि स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय जवाबदेह जांच के ज़रिए न सिर्फ़ श्रीलंका बल्कि दूसरी जगह के नागरिकों में भी विश्वास बहाल होगा."

इनकार

उन्होंने कहा, "पीड़ितों को न्याय दिलाने और उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए अब ठोस क़दम उठाने की ज़रूरत है ताकि जवाबदेही बढ़े और मेल-जोल की स्थाई सूरत निकले."

इससे पहले 'क्राइस ग्रुप' ने श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के युद्धापराधों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था से जाँच की माँग की है.

हालांकि श्रीलंका सरकार आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने की बात से साफ़ इनकार करती आई है.

श्रीलंका सरकार ने एक आठ सदस्यीय आयोग गठित किया है जो संघर्ष से सबक और मेलमिलाप को बढ़ावा देने के उपाय सुझाएगा.

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