श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे का भारत दौरा

राजपक्षे

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे मंगलवार से तीनदिवसीय भारत दौरे पर आ रहे हैं.

दिल्ली यात्रा के दौरान वो भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करेंगे.

भारत-श्रीलंका के बीच पारंपरिक रूप से नजदीकी संबंध रहे हैं. लेकिन भारत चाहता है कि राष्ट्रपति राजपक्षे तमिलों को स्वायत्तता के संबंध में कुछ क़दम उठाए.

हालांकि श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई पर भारत ने कोई सवाल नहीं उठाए थे.

हाल में राष्ट्रपति राजपक्षे ने कोलंबो में आयोजित बॉलीवुड के प्रतिष्ठित आइफ़ा फ़िल्म समारोह में हिस्सा लिया था, हालांकि इस समारोह का तमिल फ़िल्म जगत के लोगों ने बहिष्कार किया था.

अपनी यात्रा से ठीक पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे ने संघर्ष विराम के बाद पहली बार विपक्षी तमिल नेताओं से मुलाक़ात की है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बातचीत का माहौल अच्छा था लेकिन इसमें कोई ठोस प्रगति नहीं हुई.

एक परिवर्तन ज़रूर आया है कि तमिल नेता पृथक राष्ट्र की अपनी पुरानी माँग पर नहीं अड़े थे.

मानवाधिकारों पर सवाल

हालांकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं का आरोप है कि श्रीलंका में गृह युद्ध के अंतिम चरण में आम तमिल आम नागरिक मारे गए थे.

श्रीलंका सरकार आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने की बात से साफ़ इनकार करती आई है.

उसने एक आठ सदस्यीय आयोग गठित किया है जो संघर्ष से सबक और मेलमिलाप को बढ़ावा देने के उपाय सुझाएगा.

ग़ौरतलब है कि मई, 2009 में श्रीलंका सेना तमिल विद्रोही संगठन को परास्त करने में सफल रही थी.

इससे पहले सेना और एलटीटीई के लड़ाकों के बीच देश के उत्तर में लंबा संघर्ष चला था. इस दौरान हज़ारों नागरिक भी युद्ध क्षेत्र में फंसे रहे.

युद्ध प्रभावित क्षेत्र में संघर्ष की क़ीमत वहाँ फंसे तमिल नागरिकों ने भी चुकाई.

इस दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से श्रीलंका सरकार के ऊपर इस बात को लेकर भी दबाव बनाया गया कि संघर्ष के दौरान बड़े हथियारों का इस्तेमाल न किया जाए ताकि आम लोगों को नुक़सान न पहुँचे.

श्रीलंका सरकार ने संघर्ष के दौरान ऐसे हथियारों के इस्तेमाल न करने की वादा किया पर कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का आरोप है कि सेना ने ज़मीनी तौर पर ऐसा नहीं किया और बड़े हथियारों की वजह से आम लोग भी निशाना बने.

संबंधित समाचार