'मदरसों से ख़तरा नहीं'

Image caption अक्सर चरमपंथ के लिए मदरसों पर उंगली उठाई जाती है.

एक अमरीकी थिंक टैंक ने कहा है पाकिस्तानी मदरसे चरमपंथ नहीं फैला रहे हैं.

अमरीका के ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन का कहना है मदरसों को अक्सर चरमपंथी की वजह के तौर पर पेश किया जाता है लेकिन “लगता नहीं है कि उनसे कोई बड़ा ख़तरा है.”

रिपोर्ट का कहना है कि 10 प्रतिशत से भी कम पाकिस्तानी छात्र मदरसों में जाते हैं.

संस्थान का कहना है कि चरमपंथ की असली वजह है देश की ख़राब सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली.

रिपोर्ट लिखनेवालों में से एक रेबेका विनथ्रॉप का कहना है कि देश में चरमपंथी मदरसों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हुई है.

उनका कहना है कि ज़्यादातर मां-बाप बच्चों को मदरसा या किसी और स्कूल में भेजना नहीं चाहते.

लेकिन इसके बावजूद इस रिपोर्ट को पेश करते समय उनका कहना था, “हमें चरमपंथी मदरसों को बेहद गंभीरता से लेने की ज़रूरत है.”

शिक्षा तंत्र

रिपोर्ट में पाया गया है कि पाकिस्तान में स्कूलों की संख्या बढ़ाने की सख़्त ज़रूरत है क्योंकि वहां शिक्षित दर मात्र 56 प्रतिशत है.

शोध में ये भी पाया गया कि पाकिस्तान में शिक्षा की जो मांग है वो सरकारी की आपूर्ति क्षमता से कहीं अधिक है.

इसके अलावा इस रिपोर्ट में पाकिस्तान के सरकारी स्कूल तंत्र को भी काफ़ी भ्रष्ट बताया गया है. इसमें कहा गया है कि शिक्षकों की नियुक्ति राजनीतिक फ़ायदों के बदले की जाती है और वो स्कूल आएं या नहीं उन्हें पैसे मिल जाते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस तरह से शिक्षा तंत्र बना है वो चरमपंथ को मदद कर रहा है.

विनथ्रॉप का कहना है कि जो पाठ्यक्रम है वो भी उग्र या असहनशील सोच को बढ़ावा देता है और उसमें आगे चलकर रोज़गार मिले उसपर ध्यान नहीं दिया गया है.

रिपोर्ट का कहना है, “पश्चिम में जिस तरह से सिर्फ़ मदरसों को एक सुरक्षा चुनौती की तरह पेश किया जा रहा है उसमें सुधार की ज़रूरत है.”

संबंधित समाचार