बांग्लादेश में फिर बनने लगे कपड़े

पुलिक का जवान
Image caption कपड़ा फैक्टरियों के मजदूर वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.

बांग्लादेश की कपड़ा फ़ैक्टरियों में एक बार फिर उत्पादन शुरू हो गया है. इनमें मंगलवार से उत्पादन ठप था.

ढाका के नज़दीक स्थित आशुलिया की क़रीब ढाई सौ फ़ैक्टरियों के मालिकों ने बुधवार को सरकार से फ़ैक्टरियों की सुरक्षा का आश्वासन मिलने के बाद उत्पादन शुरू कर दिया.

मज़दूरों का यह आंदोलन वेतन बढ़ोतरी के मुद्दे पर शनिवार को शुरू होने के बाद से हिंसक हो गया था.

अर्थव्यवस्था पर असर

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था कपड़ा निर्यात पर बहुत निर्भर है. यहाँ निर्यात से होने वाली कमाई का 80 फ़ीसद हिस्सा कपड़ा निर्यात से आता है.

निर्माताओं का कहना है कि जो फ़ैक्टरियाँ बंद हुई थीं, वहाँ से वॉलमार्ट, एचएंडएम, ज़ारा को कपड़ों को आपूर्ती की जाती थी.

बांग्लादेश की कपड़ा फैक्टरियों में वेतन और काम की स्थितियाँ काफी लंबे समय से चिंता का विषय हैं.

मंगलवार को अनिश्चितकाल के लिए उत्पादन बंद करने के बाद से फैक्टरी मालिकों ने अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की थी.

इस ख़बर से नाराज़ हज़ारों मजदूरों ने प्रदशर्न करते हुए टायर जलाए थे और वाहनों को नुक़सान पहुँचाया था.

बांग्लादेश गारमेंट मैनफैक्चूरिंग एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल सलाम मुर्शीद ने कहा, "सरकार और क़ानून लागू करने वाली अन्य एजेंसियों ने हमें पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया है. इसके परिणाम स्वरूप हमने सभी कपड़ा फैक्टरियों को फिर से खोल दिया है."

पुलिस ने कहा है कि अशुलिया बुधवार को शांत था और स्थिति हमारे नियंत्रण में है.

मज़दूरों के संगठन गारमेंट वर्कर यूनिटी फोरम के अध्यक्ष मुशर्रफ मिशु ने कहा सरकार ने जुलाई के अंत तक वेतन में न्यूनतम बढ़ोतरी का आश्वासन दिया है, इसके बाद से मजदूर काम पर लौट गए.

ख़राब स्थिति

उन्होंने कहा,' अगर न्यूनतम वेतन पाँच हजार टका प्रतिमाह नहीं बढ़ाया गया तो हम फिर प्रदर्शन करेंगे.'

एक फ़ैक्टरी मालिक ने बताया कि करीब दो सौ फ़ैक्टरियों में तोड़फोड़ की गई है. इससे खरीदारों को निर्धारित समय सीमा में आपूर्ति करने में कठिनाई आएगी.

सोमवार को हजा़रों मज़दूरों ने फैक्टरियों से निकलकर आशुलिया में प्रदर्शन किया था.

पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे मज़दूरों पर रबड़ की गोलियाँ और आँसू गैस के गोले छोड़े थे. मज़दूरों ने पुलिस पर पत्थर बरसाए थे और गाड़ियों में आग लगा दी थी.

मंगलवार को फैक्टरियों के बंद होने की ख़बर आते ही हज़ारों मजदूर एक बार फिर सड़कों पर आ गए थे. इनमें कम से कम 30 लोगों के घायल हो गए थे.

संवाददाताओं का कहना है कि मज़दूरों के वेतन में बढ़ोतरी अंतिम बार 2006 में हुई थी. उसके बाद से खाद्य पदार्थों और प्रापर्टी की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है.

बांग्लादेश के कपड़ा मज़दूर दुनिया में सबसे कम मज़दूरी पाने वाले में से हैं.

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