छेड़छाड़ के बाद बढ़ती आत्महत्याएँ

फ़ाइल फ़ोटो
Image caption बांग्लादेश में महिलाएं महफ़ूज़ नहीं हैं.

बांग्लादेश में इस हफ़्ते एक और युवती ने छेड़छाड़ के कारण आत्महत्या कर ली है.

राजधानी ढाका के क़रीब मुंशीगंज शहर में 15 वर्ष की हसना रहमान सिंथिया ने तीन लड़कों के ज़रिए छेड़छाड़ किए जाने के बाद ख़ुदकुशी कर ली.

सरकार ने छेड़ख़ानी करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने का वादा किया है.

बांग्लादेश में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की घटनाएं बहुत आम है. जवान लड़कियों को अक्सर अपने सहपाठियों से या राह चलते सड़क पर भद्दे मज़ाक़, अपशब्द या गालियों का सामना करना पड़ता है.

इस अपमान और बेइज्ज़ती को कई लड़कियां बर्दाशत नहीं कर पाती हैं और इससे तंग आकर अपनी जान दे देती हैं.

मानवधिकार संगठन ऐनोशालीश केंद्र के मुताबिक़ इस साल अब तक देश भर में लगभग 20 लड़कियों और महिलाओं ने छेड़ख़ानी के कारण अपनी जान दे दी है.

मीडिया में आई एक ख़बर के अनुसार हाल ही में फ़ेनी शहर में एक लड़की के पिता की हत्या कर दी गई थी जब वह तीन लड़कों के ज़रिए उनकी बेटी के साथ छेड़छाड़ किए जाने का विरोध कर रहे थे.

बढ़ती घटनाएँ

पिछले वर्ष उच्च न्यायालय ने शारिरिक हमला करने, अपशब्द कहने या मोबाइल फोन के ज़रिए गंदे संदेश भेजने पर पाबंदी लगा दी थी.

बांग्लादेश के शिक्षा मंत्री नूरुल इस्लाम नाहिद मानते हैं कि इस समस्या को हल करने के लिए सिर्फ़ अदालती आदेश काफ़ी नहीं हैं.

उनका कहना है कि, '' ये सच है कि केवल उच्च न्यायालय का आदेश या क़ानून इसको नहीं रोक सकता चूंकि हमलोग हर जगह पुलिस नहीं तैनात कर सकते और हर आदमी की मदद नहीं कर सकते. इसलिए कोर्ट के आदेश का पालन करने और अपनी ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए हमलोग एक सामाजिक आंदोलन शुरु कर रहे हैं ताकि स्कूल जाने वाली लड़कियों की हिफ़ाज़त की जा सके.''

पुलिस कई बार छेड़ख़ानी करने के आरोप में लड़कों को गिरफ़्तार भी करती है लेकिन अक्सर कथित सामाजिक कलंक के कारण इसकी शिकार लड़कियां केस को आगे नहीं ले जाना चाहती हैं जिस कारण दोषियों को सज़ा नहीं हो पाती.

लड़की के परिवार वाले भी अदालत के चक्कर काटने से परहेज़ करते हैं और माता पिता कम उम्र में ही लड़कियों की शादी कर देते हैं ताकि लड़कियां छेड़छाड़ से बच जाएं.

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि हालांकि मीडिया अब इस तरह की घटनाओं को उठाने लगा है और पीड़ित लड़कियां भी सामने आकर अपनी आपबीती सुनाने लगीं हैं लेकिन बावजूद इसके इस तरह की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है.

उनका कहना है कि देश का मौजूदा क़ानून छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने में असमर्थ है, इस समस्या से निपटने के लिए सख़्त क़ानून की ज़रुरत है.

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