नेपाल में गैंडों के लिए 'हनीमून सुइट'

फ़ाइल फ़ोटो
Image caption गैंडों के प्रजनन के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं

जानवरों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना जिसमें वे आसानी से प्रजनन कर सकें, ये दुनिया भर में चिड़ियाघर के अधिकारियों के लिए एक चुनौती होता है.

लेकिन नेपाल की राजधानी काठमांडू के चिड़ियाघर के अधिकारियों का मानना है कि वे शायद दो एशियाई गैंडों के लिए एक संपूर्ण घर बनाने में सफल हो गए हैं जिसमें वो दोनों गैंडे प्रजनन कर सकते हैं.

चिड़ियाघर के अधिकारियों ने इसे 'हनीमून सुइट' का नाम दिया है जिसका उदघाटन इसी सप्ताह हुआ.

अब तक 20 साल का कांचा, 22 साल के मादा गैंडा कांची के साथ कीचड़ में पड़ा रहता था और वे दोनों अक्सर लड़ते रहते थे लेकिन चिड़ियाघर के अधिकारियों ने अब उनके लिए एक ख़ास क़िस्म का घर बना दिया है.

नए घर में दोनों गैंडों के लिए साथ साथ रहने के अलावा अलग अलग रहने के लिए भी जगह है. इस परियोजना को नेपाल के 'ऐस विकास बैंक' ने प्रायोजित किया है.

बढ़ती निकटता

परियोजना प्रमुख सिद्धांत पांडे के मुताबिक़,'' नए घर ने दोनो जानवरों के बीच निकटता बढ़ा दी है. पहले दोनों गैंडों को अलग रखा जाता था क्योंकि वे दोनों बहुत लड़ते थे लेकिन अब शायद नए वातावरण के कारण आप दोनों जानवरों में मेलमिलाप देख सकते हैं.''

इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि दोनों गैंडे प्रजनन कर सकें. एक सींग वाले एशियाई गैंडे विलुप्त होने वाले प्राणी हैं. नेपाल में अब सिर्फ़ 435 गैंडे बचे हैं.

अवैध शिकार और घटते प्राकृतिक वातावरण के कारण दिन प्रतिदिन इनकी संख्या कम होती जा रही है.

काठमांडू चिड़ियाघर की मैनेजर सरिता कहती हैं, '' नेपाल में दस वर्ष तक चले गृह युद्ध के कारण भी गैंडों को नुक़सान पहुँचा. नेपाल की सेना और राष्ट्रीय पार्क के अधिकारी मिलकर वन्य जीव जंतुओं की हिफ़ाज़त करते थे लेकिन नेपाल में हिंसा के दौरान सेना दूसरे कामों में लगी थी और इस दौरान कई पार्क पोस्टों को नष्ट कर दिया गया.''

चिड़ियाघर के अधिकारी मादा गैंडा कांची पर नज़र रखे हुए हैं, ये देखने के लिए की वो गर्भवती तो नहीं हो रही हैं.

अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि इस परियोजना से उन्हें एक नया गैंडा मिल जाएगा.

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