बुर्क़े की बाध्यता नहीं

Image caption बांग्लादेश में बुर्क़ा पहनने की परंपरा रही है

बांग्लादेश में सरकार ने शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि स्कूल-कॉलेजों में किसी छात्रा को बुर्क़ा पहनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा.

बांग्लादेश के शिक्षा सचिव की ओर से भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि अगर कोई शिक्षण संस्थान छात्र-छात्राओं पर दबाव डालेगा तो उसके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.

शिक्षा मंत्रालय ने जो निर्देश दिया है उसमें बांग्लादेश के संविधान का हवाला दिया गया है और कहा गया है कि किसी छात्रा को बुरक़ा पहनने के लिए बाध्य किया गया तो उस शिक्षण संस्थान के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

शिक्षा मंत्रालय ने यह निर्देश 22 अगस्त के हाइ कोर्ट के एक फ़ैसले के बाद जारी किया है जिसमें कहा गया था कि किसी महिला को शिक्षण संस्थानों या दफ़्तरों में बुरक़ा पहनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.

बांग्लादेश के ख़ास तौर पर ग्रामीण इलाक़ों और मदरसों में छात्राओं को बुरक़ा पहनने के लिए मजबूर किया जाता रहा है. बांग्लादेश में कई महिला संगठनों और छात्राओं ने शिकायत की थी कि उन्हें जबरदस्ती बुरक़ा पहनना पड़ रहा है.

ढाका में एक कॉलेज की छात्रा तानिया सुल्ताना कहती हैं, "मेरी जैसी जिन लड़कियों ने बुरक़ा पहनने की बात नहीं मानी उनके साथ बुरा व्यवहार किया गया. इस दबाव की वजह से कई लड़कियों को कॉलेज छोड़ दिया, बुरक़ा पहनने के लिए कहने में कोई बुराई नहीं है लेकिन इस सलाह को मानने या न मानने आज़ादी हमारी है, बाध्य किया जाना बिल्कुल ग़लत है".

लेकिन दूसरी ओर दक्षिण पश्चिम ढाका के एक स्कूल के हेडमास्टर गुलाम सरवर कहते हैं कि ज्यादातर स्कूलों में लड़कियों के बुरक़ा पहनने की वजह स्थानीय रीति-रिवाज है न कि बाध्यता.

वे कहते हैं, "हमारे स्कूल में कुछ लड़कियाँ बुरक़ा पहनती हैं, कुछ नहीं पहनतीं, हमने किसी को बाध्य नहीं किया, यहाँ के स्थानीय लोग अपनी परंपरा के हिसाब से चलते हैं, अब सरकारी आदेश है तो हम लोगों को बता देंगे कि बुरक़ा पहनने की कोई बाध्यता नहीं है, पहले भी नहीं थी".

इस निर्देश में ये भी कहा गया है कि स्कूल कॉलेजों में छात्राओं को खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने से नहीं रोका जा सकता.

संबंधित समाचार