राजपक्षे के हाथ और मज़बूत हुए

श्रीलंका की संसद ने उस विवादास्पद क़ानून को मंज़ूरी दे दी है जिसके तहत राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के अधिकारों का दायरा काफ़ी बढ़ जाएगा.

साथ ही राजपक्षे अब जितनी बार चाहें राष्ट्रपति की कुर्सी के लिए चुनाव लड़ सकते हैं.

इसके तहत उन्हें वरिष्ठ न्यायाधीशों को नियुक्त करने का भी अधिकार होगा.

विपक्षी दल इसके ख़िलाफ़ थे और पिछले दो दिनों से राजधानी कोलोंबो में कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

मौजूदा संविधान के प्रावधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति अधिकतम दो बार ही राष्ट्रपति पद बन सकता था.

इस संशोधन को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्कता थी और सरकार ने इसे हासिल कर लिया.

इस क़ानून के विरोध में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बुधवार को काला दिवस घोषित किया था और कई प्रदर्शन भी किए.

मंगलवार को भी हज़ारों लोगों ने इसके विरोध में आयोजित प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था.

राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे दूसरी बार राष्ट्रपति चुने गए हैं और मौजूदा संविधान की व्यवस्था के अनुसार वो आगे चुनाव नहीं लड़ सकते थे.

महिदा राजपक्षे का कहना है कि इस नए प्रस्ताव से लोकतंत्र मजबूत होगा.

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