सीआईए हमला: जाँच ठीक से नहीं की गई

तालिबान नेता हकीमुल्ला महसूद के साथ अल बलावी
Image caption हुमाम कलील अबू मुलाल अल बलावी ने महत्वपूर्ण जानकारी देने का भरोसा दिलाकर अपने आपको धमाके से उड़ा लिया था

अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने ये माना है कि जिस मुख़बिर ने जनवरी में आत्मघाती हमले में सात सीआईए एजेंटों को मार दिया था उसकी ठीक से जाँच नहीं की गई थी

अल क़ायदा से सहानुभूति रखने वाले जॉर्डन के हुमाम कलील अबू मुलाल अल बलावी ने महत्वपूर्ण जानकारी देने का भरोसा दिलाकर सीआईए अधिकारियों को मिलने बुलाया और फिर अपने आपको धमाके से उड़ा लिया था. इस हमले में सात सीआईए एजेंट मारे गए थे.

1983 में बेरूत में अमरीकी दूतावास पर हुए हमले के बाद सीआईए पर ये सबसे बड़ा हमला था.

अफ़ग़ानिस्तान में सीआईए ख़ुफ़िया सूचनाएं इकट्ठी करता है और यहीं से तालेबान नेताओं को लक्ष्य करके मानवविहीन ड्रोन हमलों को संचालित किया जाता है.

अमरीकी अख़बारों का कहना है कि सीआईए ने इस हमलावर को अल क़ायदा के नंबर दो यानि अयमन अल ज़वाहिरी तक पहुंचने का काम सौंपा था.

जब अफ़गानिस्तान में सीआईए के अड्डे पर ये हमला हुआ था तो सवाल उठे थे कि ये हमलावर अंदर तक पहुंचा कैसे.

कैसे बने निशाना

ऐसी ख़बरें हैं कि हमलावर ने अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद सीआईए के अधिकारियों को ये कहकर बुलाया कि उसके पास बेहद अहम जानकारी है.

जब अधिकारी इकट्ठा हुए तो उसने ख़ुद को उड़ा डाला और सात सीआईए एजेंटों की जानें ले लीं.

सीआईए निदेशक लेयोन पनेटा ने अपने कर्मचारियों को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने इस हमले के कारणों को गिनाया है.

इसमें उन्होंने कहा कि सीआईए अधिकारियों ने बम हमला करने वाले व्यक्ति के बारे में चेतावनियों की अनदेखी की.

पनेटा का कहना है कि जाँच से पता चला है कि अल बलावी ने जो गुप्त सूचनाएँ दी थीं, उनकी जाँच की गई और सीआईए अधिकारियों का ऐसा मानना था कि वो और जानकारियाँ उपलब्ध करा सकते थे.

पनेटा का कहना था, ''ये बात पुष्ट थी कि उनका चरमपंथियों से संपर्क था और वो उपयोगी साबित हो सकते थे.''

सीआईए निदेशक ने लिखा है कि लेकिन अल बलावी ने अपने चरमपंथी अतीत से नाता नहीं तोड़ा.

वॉशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सबसे गंभीर तथ्य ये है कि सीआईए को जॉर्डन के गुप्तचर सेवा ने चेतावनी थी कि अल बलावी दोहरे एजेंट हो सकते हैं और वो अल क़ायदा से संबंद्ध हो सकते हैं.

ये सूचना आत्मघाती हमले से एक महीने पहले मिली थी लेकिन जॉर्डन स्थित सीआईए अफसरों ने इस चेतावनी को आगे नहीं बढ़ाया.

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