चीनी मदद से बनी श्रीलंकाई बंदरगाह

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने देश में एक बड़े बंदरगाह का उदघाटन किया है.ये बंदरगाह चीन की मदद से बनाया गया है.

चीनी कंपनियों के कर्मचारियों ने इस पर काम किया है और वित्तीय मदद चीन के एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक से मिली है.

राजपक्षे ने अपने गृह नगर हमबनटोटा में बंदरगाह का उदघाटन अपना दूसरा कार्यकाल शुरु होने से एक दिन पहले किया है. वे शुक्रवार को दोबारा राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे.

बंदरगाह का काम समय से पूर्व ही ख़त्म कर लिया गया है और दो नए चरणों पर काम शुरु हो रहा है.हमबनटोटा में बनी बंदरगाह की राजपक्षे सरकार के लिए विशेष अहमियत है.

श्रीलंका विश्व की एक बड़ी व्यस्त शिपिंग लेन के काफ़ी नज़दीक है. नया बंदरगाह से श्रीलंका को आर्थिक फ़ायदा होगा.

बंदरगाह में आने वाले पहले तीन जहाज़ श्रीलंकाई थे- एक यॉच, एक कार्गो जहाज़ और एक यात्री समुद्री जहाज़ जिसमें बौद्ध भिक्षु थे. ये भिक्षु राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ दे रहे थे.

अपने भाषण में महिंदा राजपक्षे ने कहा है कि अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने दो वायदे पूरे किए हैं- शांति स्थापित करना और दूसरा नए देश का निर्माण करना.हालांकि विपक्ष का कहना है कि राजपक्षे ने तमिल समुदाय की बात नहीं सुनी है और युद्ध में मिली जीत का वो पूरा फ़ायदा नहीं उठा सके हैं.

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