हिंसा छोड़ने वालों के लिए पुनर्वास नीति

भारत प्रशासित राज्य जम्मू कश्मीर में सरकार ने ऐसे युवाओं के लिए पुनर्वास नीति को मंज़ूरी दे दी है जो चरमपंथ के लिए प्रशिक्षण पाने के मकसद से पाकिस्तान गए हैं.

ये फ़ैसला राज्य कैबिनेट की बैठक में लिया गया जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री उमर फ़ारुख़ ने की.

इस ‘पुनर्वास नीति’ के तहत ऐसे युवा मुख्यधारा में वापस आ सकेंगे जो हथियारों में प्रशिक्षण पाने के लिए पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर चले गए थे ताकि भारत प्रशासित कश्मीर में चरमपंथ गुटों का हिस्सा बन सके.

एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया है, “जो युवा हिंसा छोड़ने के लिए तैयार हैं ये नीति उन युवाओं के लिए है. ऐसे लोगों की स्क्रीनिंग बहुत ध्यान से की जाएगी जिसमें कई सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियाँ शामिल रहेंगी. हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि इस नीति का फ़ायदा सही लोग उठाएँ और इसमें कहीं कोई ख़ामी न हो.”

इस बारे में ठीक से तथ्य नहीं है कि कितने लोग पाकिस्तान गए हैं. लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक ऐसे करीब तीन हज़ार लोग हो सकते हैं.

उमर फ़ारुख़ कह चुके हैं कि ये नीति सदभावना और विश्वास बहाली का क़दम है.

भाजपा का विरोध

इस योजना के तहत पहले लोगों की पहचान, स्क्रीनिंग, यात्रा, डिब्रिफ़िंग, पुनर्वास होगा और फिर मुख्यधारा में शामिल करने का काम होगा.

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने तभी इस नीति को अपनी मंज़ूरी दे दी थी जब जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने विचार रखा था.

उन्होंने तब कहा था, “हम इस विचार से सहमत हैं और अब इसे योजना का रूप देना होगा.”

वहीं विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने इस योजना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

पार्टी नेता चमन लाल गुप्ता का कहना है, “हम ऐसे लोगों का स्वागत कैसे कर सकते हैं जो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर गए थे ताकि वे भारत के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए प्रशिक्षण ले सकें. ये एक ख़तरनाक क़दम है और एक बड़ा जोखिम. हम इसका विरोध करेंगे.”

भाजपा के मुताबिक ये योजना दरअसल उसी का विचार था जिसे नेशनल कॉफ़्रेंस ने ठुकरा दिया था जब वो विपक्ष में थी.

पार्टी के प्रवक्ता नईम अख़्तर का कहना है कि ये मूल तौर पर भाजपा का विचार है लेकिन ये देखना होगा कि इसे कैसे लागू किया जाता है.

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