श्रीलंका में तमिल राष्ट्रगान बंद

श्रीलंकाई सैनिक

लिट्टे के खात्मे के बाद तमिलों के अधिकारों की बात कोई नहीं कर रहा है.

श्रीलंका की सरकार ने देश के राष्ट्रगान के तमिल अनुवाद और गायन को समाप्त करने की घोषणा की है.

श्रीलंका के मंत्रिमंडल ने यह फ़ैसला किया है और कहा है कि राष्ट्रगान को सिर्फ़ और सिर्फ़ बहुसंख्यक सिंहलाभाषियों की भाषा यानी सिंहला में ही गाया जाए.

बाद में श्रीलंका सरकार में एक तमिल कैबिनेट मंत्री ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि राष्ट्रगान का तमिल संस्करण बंद किया जा रहा है.

मंत्री ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर विचार विमर्श किया गया लेकिन तमिल संस्करण को बंद किए जाने पर कोई सहमति नहीं हुई इसलिए राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने तमिल और सिंहला दोनों ही संस्करण रखने का फ़ैसला किया है.

उल्लेखनीय है कि देश में सिंहला भाषी लोगों की संख्या अधिक है. हालांकि श्रीलंका में तमिलों की अच्छी खासी संख्या है और देश के उत्तर पूर्व में रहने वाले तमिल ये राष्ट्रगान तमिल में ही गाते हैं.

राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का कहना था कि सभी को श्रीलंका को एक देश के रुप में देखना होगा. राष्ट्रपति का कहना था कि दुनिया के किसी भी अन्य देश में राष्ट्रगान एक से अधिक भाषा में नहीं है.

उनका कहना था कि तमिल और सिंहला में राष्ट्रगान का होना एक ग़लती थी जिसे ठीक किया गया है.

हालांकि राष्ट्रगान सिंहला भाषा में था और तमिल में इसका हूबहू अनुवाद किया गया था. इतना ही नहीं तमिल में राष्ट्रगान उसी धुन पर गाया भी जाता था जिस धुन पर सिंहला में.

श्रीलंका को 1948 में आज़ादी मिली थी और उसके बाद से ही राष्ट्रगान के दोनों रुप देश में चल रहे थे.

श्रीलंका की सरकार का यह फ़ैसला देश में दशकों से तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ चल रहे गृह युद्घ के खत्म होने के 18 महीने बाद आया है. श्रीलंका की सेना ने 18 महीने पहले तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई को ज़बर्दस्त तरीके से हरा दिया था.

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