'मौत के दस्ते' को प्रशिक्षण देता है ब्रिटेन

बांग्लादेश पुलिस
Image caption ‘रैपिड एक्शन बटालियन' पर मानवाधिकार हनन के आरोप लगते रहे हैं

ब्रितानी अधिकारियों ने विकीलीक्स के उन ख़बरों की पुष्टि की है कि ब्रिटेन बांग्लादेश में पुलिस बलों के 'मारक दस्तों' को प्रशिक्षित कर रहा है.

ग़ौरतलब है कि बांग्लादेश में 'रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी)' पर 'मौत का दस्ता' होने का आरोप लगता रहा है.

विकीलीक्स के मुताबिक 'रैपिड एक्शन बटालियन' के सदस्यों को ब्रितानी अधिकारी 'इंटरव्यू की तकनीकियों' और 'काम-काज के नियमों' को सिखाते हैं.

वर्ष 2004 में अपराध और आतंकवाद से लड़ने के लिए 'रैपिड एक्शन बटालियन' का गठन किया गया था.

इस सुरक्षा बल में क़रीब नौ हज़ार जवान हैं जिन पर 550 लोगों की हत्या का आरोप है.

विकीलीक्स की एक संदेश के मुताबिक 'रैपिड एक्शन बटालियन' पर मानवाधिकार के हनन के आरोपों के चलते अमरीकी ने सामरिक प्रशिक्षण देने से इंकार कर दिया था.

वेबसाइट विकीलीक्स के पास अमरीकी राजनयिकों के करीब ढाई लाख केबल मौजूद हैं जिसमें से उसने कई गोपनीय दस्तावेजों को अखबारों में प्रकाशित किया है.

मानवाधिकार हनन का आरोप

विकीलीक्स के मुताबिक ढाका में अमरीका के राजदूत जेम्स मोरियारटि ने लिखा था, "पिछले 18 महीनों से ब्रिटेन आरएबी को इंटरव्यू की तकनीकियों और काम-काज के नियमों को लेकर प्रशिक्षित करता रहा है."

एक अन्य केबल में मोरियारटि ने नोट किया है कि 'आरएबी पर लगे आरोपों के चलते मानवाधिकार के क्षेत्र में प्रशिक्षण के अलावे किसी भी तरह की सहायता देना अमरीका के लिए ग़ैर क़ानूनी होगा'.

इससे पहले विकीलीक्स ने इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीकी नीतियों से जुड़े चार लाख से ज़्यादा दस्तावेज़ जारी किए थे.

मानवाधिकार समूहों का कहना है कि आरएबी मौत का सरकारी दस्ता है.

बांग्लादेश में ब्रितानी उच्चायोग के अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि आरएबी को दी जा रही ट्रेनिंग कार्यक्रम वर्ष 2008 में शुरू की गई थी जो मार्च 2011 में पूरी हो जाएगी.

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