'भारत अफ़ग़ानिस्तान में डटा रहेगा'

कृष्णा और करज़ई
Image caption अफ़ग़ानिस्तान की हरसंभव सहायता का वादा दोहराया कृष्णा ने

भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने अपनी दो दिन की अफ़ग़ानिस्तान यात्रा के दौरान कहा है कि सुरक्षा ख़तरों के बावजूद "भारत अफ़ग़ानिस्तान में डटा रहेगा".

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा है कि पड़ोसी और पुराना दोस्त होने के नाते भारत की दिलचस्पी इस बात में है कि अफ़ग़ानिस्तान शांति और स्थायित्व आए और इसके लिए भारत अफ़ग़ानिस्तान की हरसंभव मदद करेगा.

उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में काम करने वाले भारतीय लोगों के लिए वहाँ 'ख़तरे बहुत वास्तविक हैं' लेकिन "जब तक अफ़ग़ानिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार चाहेगी भारत की मौजूदगी यहाँ बनी रहेगी."

कृष्णा ने विश्वास व्यक्त किया कि अफ़ग़ानिस्तान सरकार भारतीय दूतावास को सुरक्षा प्रदान करने में पूरी तरह सक्षम है.

कृष्णा ने कहा कि भारत अफ़ग़ानिस्तान में चल रही शांति प्रक्रिया में अपने लिए एक सकारात्मक और प्रभावी भूमिका देखता है, साथ ही उन्होंने पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि "बाहरी हस्तक्षेप अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया के लिए नुक़सानदेह होगा."

अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री ज़ल्मै रूसल के साथ बातचीत के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, "एक स्थिर, लोकतांत्रिक, बहुसांस्कृतिक और समृद्ध अफ़ग़ानिस्तान के निर्माण में किसी तरह का बाहरी हस्तक्षेप ख़तरनाक होगा और वह शांति प्रक्रिया को ख़तरे में डालने वाला होगा."

भारतीय विदेश मंत्री अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से भी मुलाक़ात की है.

एसएम कृष्णा ने अफ़ग़ानिस्तान में घोषणा की कि भारत सूखे की स्थिति से निबटने के लिए एक हज़ार टन गेहूँ उपलब्ध कराएगा.

भारत अफ़ग़ानिस्तान के नवनिर्माण में विभिन्न परियोजनाओं के ज़रिए धन लगाने वाली सबसे बड़ी क्षेत्रीय शक्ति के रूप में देखा जाता है.

जानकारों का कहना है कि इस समय अफ़ग़ानिस्तान में भारत और पाकिस्तान दोनों अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं इसलिए दोनों के बीच लगातार खींचतान चलती रहती है.

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