'लड़कियों की शिक्षा पर आपत्ति नहीं'

अफ़ग़ानिस्तान के शिक्षा मंत्री ने कहा है कि लड़कियों के स्कूल जाने को लेकर तालिबान ने अपना विरोध ख़त्म कर दिया है.

शिक्षा मंत्री फ़ारुक़ वरदक ने ब्रिटेन में विश्व शिक्षा फ़ोरम में कहा कि ‘सांस्कृतिक बदलाव’ का मतलब है कि ‘तालिबान अब लड़िकयों की पढ़ाई के ख़िलाफ़ नहीं’ है.

तालिबान के शासनकाल के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों को न ही स्कूल जाने की अनुमति थी और न नौकरी करने की.

शिक्षा मंत्री ने माना कि स्कूल जाने को लेकर विरोध अफ़ग़ान समाज में बरसों से चलता रहा है और ये सिर्फ़ तालिबान तक ही सीमित नहीं है.

फ़ारुक़ वरदक का कहना था, “यही वजह है कि अफ़ग़ानिस्तान के कई प्रांतों में तो पुरुष या महिला शिक्षक तक नहीं हैं. तालिबान शासनकाल के दौरान कोई भी लड़की स्कूल नहीं जाती थी. स्कूलों में एक भी महिला शिक्षक नहीं थीं. लेकिन आज 38 फ़ीसदी छात्राएँ हैं और 30 फ़ीसदी महिला शिक्षक.”

समाज में विरोध

तालिबान पर अफ़ग़ान शिक्षा मंत्री ने कहा, “तालिबान में उच्च स्तर पर बनने वाली नीतियों के तहत ये बात सुनने में आई है कि वो अब शिक्षा के ख़िलाफ़ नहीं है. मैं उम्मीद करता हूँ कि जल्द ही विपक्षी खेमे के साथ शांतिपूर्ण बातचीत होगी जिसमें उन मानवाधिकारों और मूल उसूलों पर समझौता नहीं किया जाएगा जिनके आधार पर हम लोगों को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं.”

पिछले साल अक्तूबर में अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने पुष्टि की थी कि नौ साल से चल रहे संघर्ष को ख़त्म करने के लिए तालिबान के साथ ग़ैर-आधिकारिक बातचीत चल रही है.

लेकिन अब शिक्षा मंत्री की बातों से लग रहा है कि ये बातचीत क़ैदियों की रिहाई जैसे मुद्दों से आगे जाकर सरकारी नीतियों जैसे मसलों तक पहुंच गई है.

फ़ारुक़ वरदक ने अफ़ग़ानिस्तान में स्कूलों के लिए पर्याप्त पैसा न देने के लिए ब्रिटेन सरकार की आलोचना की है.

ब्रिटेन ने 2009-10 में अफ़ग़ान स्कूलों पर एक करोड़ बीस लाख पाउंड खर्च किए हैं.

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