पुनर्वास हुआ पर लोगों की स्थिति कमज़ोर

संयुक्त राष्ट्र की एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि श्रीलंका में युद्ध समाप्त होने के बाद जिन नागरिकों का पुनर्वास किया गया था वे लोग अब भी कमज़ोर और संवेदनशील स्थिति में है.

मानवीय मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र की सह महासचिव कैथरीन ब्रैग इनदिनों श्रीलंका के दौरे पर हैं.उन्होंने उत्तर में कई ऐसी जगहों का दौर किया जहाँ लोगों को दोबारा बसाया गया है.मीडिया को आमतौर पर इन जगहों पर जाने नहीं दिया जाता.

तमिल विद्रोहियों और श्रीलंकाई सेना के बीच संघर्ष के दौरान उत्तरी श्रीलंका के ज़्यादातर हिस्सों से लोग इलाक़ा छोड़कर चले गए थे.

अब सेना की कड़ी निगरानी के तहत इस क्षेत्र को फिर से बसाया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र अधिकारी कैथरीन ब्रैग ने यहाँ दोबारा बसे कई परिवारों से मुलाक़ात की.

उत्तरी श्रीलंका में बुनियादी ढाँचा फिर से खड़ा करने के लिए उन्होंने सरकार की तारीफ़ की और कहा कि स्कूलों का खुलना अच्छी बात है.

पर साथ ही कहा कि तमिल लोगों की रोज़मर्रा की ज़रूरतें जैसे स्वास्थ्य सेवा आदि पर और ध्यान देने की ज़रूरत है.

'सामाजिक विकास हो'

कैथरीन ब्रैग का कहना था, “ये लोग अब भी कमज़ोर स्थिति में है. उत्तरी श्रीलंका का भविष्य इन लोगों पर ध्यान देने से ही जुड़ा हुआ है. इन्हें रोज़गार चाहिए, सामाजिक विकास चाहिए ताकि ये ज़िंदगी में आगे बढ़ सकें.”

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी का ये भी कहना था कि श्रीलंका सरकार और यूएन की शरणार्थी एजेंसी ने पुनर्वास के लिए जो पैसा दिया है वो कोई तीन महीने तक ही चलेगा.

कैथरीन ब्रैग ने पूर्वी श्रीलंका के उन हिस्सों का भी दौरा जो भारी बारिश से और बाढ़ प्रभावित हैं.यहाँ लोग घरों में लौट आए हैं लेकिन मकानों को नुकसान पहुँचा है, कुँओं का पानी दूषित हो गया है और मवेशी बड़ी संख्या में मर गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने अपील की है कि बाढ़ प्रभावितों के लिए पाँच करोड़ दस लाख डॉलर इकट्ठा किए जाएँ.

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