फ़ोनसेका समर्थकों की रैली

जनरल फ़ोनसेका
Image caption जनरल फ़ोनसेका राष्ट्रपति का चुनाव हार गए थे

राष्ट्रपति चुनाव में पराजित हुए जनरल सरथ फ़ोनसेका की गिरफ़्तारी को एक साल पूरे होने पर श्रीलंका के विपक्षी दल एक बड़ी रैली निकाल रहे हैं.

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से चुनाव हारने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था.

एक सैन्य अदालत में भ्रष्टाचार के लिए दोषी पाए जाने के बाद गत सितंबर में उन्हें जेल भेज दिया गया था.

जेल भेजे जाने के बाद उन्हें अपनी संसदीय सीट से भी हटना पड़ा था. अभी उनके ख़िलाफ़ कई और अदालती मामले चल रहे हैं.

विरोध की क़ीमत?

सिर्फ़ 13 महीनों पहले श्रीलंका में ऐसा माहौल था कि लगता था कि महिंदा राजपक्षे को टक्कर देने वाला एक उम्मीदवार मिल गया है.

सरथ फ़ोनसेका ने तमिल विद्रोहियों के संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल इलम के ख़िलाफ़ युद्ध में सेना का नेतृत्व किया था.

लेकिन अपने पुराने मित्र सरथ फ़ोनसेका के साथ इस बात पर मतभेद हो गए थे कि इस जीत का श्रेय कौन लेगा.

यह जगज़ाहिर है कि दोनों ही लोग कट्टर सिंहली राष्ट्रवादी हैं और इसी बात ने उनके चुनाव में और कड़वाहट घोल दी थी.

लेकिन राजपक्षे के चुनाव जीतने के बाद यह साफ़ हो गया था कि इसका खामियाज़ा फ़ोनसेका को भुगतना होगा.

नतीजे आने के तुरंत बाद उस होटल को सेना ने घेर लिया था जहाँ से वे प्रचार अभियान संचालित कर रहे थे. 12 दिन के बाद सेना में उनके मातहत रहे एक सैन्य अधिकारी के नेतृत्व में सैन्य पुलिस ने फ़ोनसेका को गिरफ़्तार कर लिया.

उनके ख़िलाफ़ सरकारी अधिकारी आनन फ़ानन में एकजुट हो गए और उन पर तख़्तापलट का षडयंत्र रचने का आरोप लगाया. उन पर वर्दी पहने होने के बावजूद राजनीति करने और रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए.

रक्षा सचिव ने तो एक संपादक की हत्या के आरोप में उन्हें फाँसी पर लटकाने की भी धमकी दी थी.

लेकिन सरथ फ़ोनसेका के समर्थक कहते हैं कि उन्हें महिंदा राजपक्षे को चुनौती देने की सज़ा चुकानी पड़ रही है.

उनका कहना है कि जो कुछ फ़ोनसेका को सहना पड़ रहा है वह विपक्षियों को सहन न करने की सरकार की नीति को बताती है.

कुछ स्वयंसेवी संगठन इस बात को लेकर दुविधा में हैं.

सैन्य प्रमुख की तरह वे फ़ोनसेका को नापंसद करते रहे हैं लेकिन अब जो सरकार उनके साथ कर रही है उसके बाद वे विचार कर रहे हैं कि उनका समर्थन किया जाए या नहीं.

लेकिन वे कह रहे हैं कि श्रीलंका में क़ानून व्यवस्था ठीक तरह से लागू न होने का खामियाज़ा जनरल फ़ोनसेका को भी भुगतना पड़ रहा है.

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