बाघ बचाव का ऐतिहासिक अभियान

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Image caption सुंदरबन के जंगलों में 400 बाघ रहते हैं

बांग्लादेश के दक्षिण में फैले सुंदरबन जंगलों में घूमते हुए एक बाघ पास के एक गाँव में पहुँचा लेकिन उस बाघ को ज़िंदा बचा लिया गया. बाघ संरक्षणकर्ताओं के अनुसार ये एक ऐतिहासिक बचाव था.

अगर ये बाघ पहले गाँव में आया होता तो इसे मार दिया गया होता, लेकिन अबकी बार गाँव वालों ने इस बाघ को देखने के बाद नज़दीकी वन अधिकारियों का सूचित कर दिया.

छह घंटे बाद एक विशेषज्ञ टीम ने इस बाघ को बेहोश कर पकड़ा और गाँव से 40 किलोमीटर दूर जंगलों में छोड़ दिया.

वन अधिकारियों का कहना है कि गाँववाले बाघ को बचाने के अभियान के प्रति जागरुक थे और उन्होंने स्थानीय टीम के साथ काफ़ी सहयोग किया.

वन विभाग में सहायक संरक्षणकर्ता तौफ़िक उल इस्लाम ने गाँव वालों को इस तरह से जागरुक करने के अभियान के बारे में बताया, ''बाघ को बचाना काफ़ी मुश्किल काम है. बाघ और मानव के बीच संघर्ष को तो आप जानते ही हैं. बाघ इंसान को मारते हैं और इंसान बाघों को निशाना बनाते हैं. यदि जंगल में रहने वाले स्थानीय लोगों को इस अभियान मे शामिल नहीं किया जाता है तो हमारे लिए बाघ को बचाना काफ़ी मुश्किल होता.''

वन अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा बचाव अन्य गाँववालों को भी भविष्य में इस तरह के बचाव के लिए प्रेरित करेगा.

भारत और बांग्लादेश में फैले सुंदरबन जंगल संकट में पड़े रॉयल बंगाल टाइगर की शरण का सबसे बड़ा ठिकाना है. एक अनुमान के मुताबिक लगभग 400 बाघ सुंदरबन के जंगलों में रहते हैं.

जब बाघ का रिहाइशी इलाका कम होता है या बाघों को शिकार करने के लिए जानवर कम होते हैं तो बाघ अक्सर भटकते हुए नज़दीकी गाँवों में पहुँच जाते है जिसके परिणाम स्वरुप बाघ और मानव आमने सामने आ जाते हैं.

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