मोहम्मद यूनुस की अपील ख़ारिज

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Image caption अदालत ने मोहम्मद युनूस की बर्ख़ास्तगी को सही ठहराया है.

ग्रामीण बैंक के संस्थापक और प्रबंध निदेशक मोहम्मद यूनुस की अपने पद से हटाए जाने के ख़िलाफ़ अपील को बांग्लादेश हाई कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है.

मोहम्मद यूनुस को पिछले हफ़्ते रिटायर होने की उम्र पार हो जाने के कारण बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने पद से हटा दिया था.

ग्रामीण बैंक के ज़रिए गरीब लोगों को छोटे कर्ज़े देकर मोहम्मद यूनुस ने माइक्रोफ़ाइनेंस की दुनिया को नया आयाम दिया है. अपने काम के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है.

यूनुस के समर्थकों का कहना है कि सरकार ने उन्हें तीन साल पहले राजनीति में प्रवेश करने की कोशिशों के कारण निष्कासित किया है.

बांग्लादेश सरकार इस आरोप का खंडन कर चुकी है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार अदालत ने कहा कि मोहम्मद यूनुस के पद पर बने रहने का कोई वैधानिक आधार नहीं है इसलिए उनकी अपील को ख़ारिज किया जाता है.

अदालत ने कहा कि यूनुस बैंक के एक अधिकारी हैं और अधिकारियों के लिए रिटायर होने की उम्र 60 वर्ष है और इस लिहाज से वे बहुत पहले ही रिटायर होने की उम्र पार कर चुके हैं.

मोहम्मद यूनुस की एक वकील सारा हुसैन ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "हम इस फ़ैसले से हैरान नहीं हैं. हमें यही उम्मीद थी. अदालत ने बांग्लादेश बैंक के ग़ैर-क़ानूनी आदेश को सही क़रार दिया है."

विवाद

2007 में मुहम्मद यूनुस ने राजनीतिक पार्टी के गठन का फ़ैसला किया था जिसके बाद उनके प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ मतभेद हो गए थे.

वहीं कुछ समय पहले ऐसे रिपोर्टें भी आई थीं कि बांग्लादेश के अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस ने ग़रीबों की मदद के लिए स्थापित किए गए ग्रामीण बैंक में कथित तौर करोड़ों डॉलर की हेराफेरी की है.

ग्रामीण बैंक की स्थापना प्रोफेसर यूनुस ने क़रीब तीन दशक पहले ग़रीबों को छोटे ऋण देने के लिए की थी.

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