भारत को बर्मा का 'आश्वासन'

चरमपंथी
Image caption भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बड़ी संख्या में चरमपंथी सक्रिय हैं.

बर्मा ने कहा है कि वो अपनी ज़मीन पर भारत के उत्तर पूर्व में सक्रिय चरमपंथियों की किसी भी प्रकार की गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा.

बर्मा के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कोलकाता में कहा कि उनकी सरकार ने इस मामले में भारत सरकार को ‘पक्के तौर पर आश्वासन’ दिया है.

बर्मा के विदेश मंत्रालय के उप महानिदेशक विन नाएंग कोलकाता में ‘भारत का पड़ोस’ नामक एक सम्मेलन में ये बात कही है.

नाएंग का कहना था, ‘‘ भारत और बर्मा दोस्त हैं और आने वाले समय में दोनों की दोस्ती बढ़ेगी. हमारी सरकार भारत के उत्तर पूर्व में सक्रिय उन चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी जो बर्मा की धरती का इस्तेमाल करेगा.’’

बर्मा का यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब ये ख़बरें भी आ रही हैं कि बर्मा के सैनिकों ने अलगाववादी नगा नेता एसएस खापलांग के कुछ ठिकानों पर गोलाबारी की है.

नाएंग का कहना था, ‘‘ हमारी सरकार प्रतिबद्ध है कि अपनी ज़मीन पर कोई आतंकवादी कार्रवाई न होने दे.जहां तक उनकी बात है जो हमारी सरकार से सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं हमने घोषणा की है कि अगर वो हथियार छोड़ें तो हम उन्हें माफ़ करने के लिए तैयार हैं.’’

भारतीय खुफ़िया रिपोर्टों के मुताबिक बर्मा की सेनाएं पिछले हफ्ते से ही भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय अलगाववादी गुट एनएससीएन (खापलांग) के बर्मा स्थित ठिकानों पर गोलाबारी कर रही है.

इस सम्मेलन में भारत के कुछ विशेषज्ञ भी मौजूद थे. पू्र्व में भारतीय खुफिया विभाग से जुड़े रिटायर्ड कर्नल हरिहरन का कहना था, ‘‘ मैं बर्मा की सेना के आश्वासन में अधिक कुछ नहीं देखना चाहता. बर्मा की सेना हमसे बहुत छोटी है और भारत ने कभी भी अलगाववादी गुटों पर पूरा हमला नहीं किया है जैसा कि बांग्लादेश और बर्मा करते रहे हैं. यह बर्मा की रणनीति का हिस्सा है कि वो इस आश्वासन के आधार पर भारत से दोस्ती बढ़ाना चाहता है.’’

इस सम्मेलन में बर्मा संबंधी बहस की अध्यक्षता कर रहे बर्मा में भारत के राजदूत आलोक सेन इस राय से सहमत नहीं थे.

सेना का कहना था कि जब वो राजदूत थे तो बर्मा ने बार बार विद्रोही सेनाओं के ख़िलाफ़ संयुक्त कार्रवाई का सुझाव दिया था लेकिन भारत सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई.

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