विदेशों में चीनी छात्रों की भारी संख्या

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Image caption विदेशों में चीनी छात्रों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि विदेशों में जाकर उच्च शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों की संख्या अभी तक सबसे ज़्यादा के रिकॉर्ड पर पहुँच गई है.

मंत्रालय का कहना है कि विदेशों में इस समय लगभग 12 लाख 70 हज़ार चीनी छात्र उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं.

वर्ष 2010 में दो लाख 84 से ज़्यादा छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में गए थे जिनमें से ज़्यादातर ने अपनी शिक्षा का ख़र्च निजी तौर पर ही उठाया था.

इसके साथ ही एक दिलचस्प पहलू ये भी है कि ज़्यादातर चीनी छात्र उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद चीन ही लौटना पसंद कर रहे हैं.

चीन ने 1970 के दशक में आर्थिक सुधार शुरू किए थे और देश की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय जगत के लिए खोली थी तब से चीन सरकार लोगों को विदेशों में शिक्षा और प्रशिक्षण हासिल करने के लिए भेजती रही है जिसमें काफ़ी ख़र्च सरकार ही उठाती रही है.

अब बहुत से मध्यमवर्गीय परिवार ख़ुद भी अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में भेजने में सक्षम होने लगे हैं और लगभग 93 प्रतिशत चीनी छात्र विदेशों में जाकर अपनी उच्च शिक्षा का ख़र्च अपनी जेब से ही उठाते हैं.

चीनी छात्रों के पसंदीदा विश्वविद्यालय अंग्रेज़ी वाले हैं, मसलन अमरीका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा इन सबमें पहली पसंद है.

कुछ विश्वविद्यालय में तो चीनी छात्रों के इतने सारे आवेदन पत्र मिले हैं कि उन्हें कोटा निर्धारित करना पड़ा है कि चीन से कितने छात्रों को प्रवेश दिया जा सकता है.

अंग्रेज़ी पसंद है

वर्ष 2009-2010 में इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में लगभग 1000 चीनी छात्रों को प्रवेश मिला जो इंजीनीयरिंग, विज्ञान, गणित, अंतरराष्ट्रीय संबंध, अर्थ शास्त्र, वित्त और प्रशासन विषयों में अध्ययन कर रहे थे.

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया से दोनों पक्षों को लाभ हो रहा है. आर्थिक मंदी के माहौल में चीनी छात्र इन विदेशी विश्वविद्यालयों को शिक्षा शुल्क के रूप में भारी-भरकम धन अदा करते हैं तो दूसरी तरफ़ चीन को विदेशों में शिक्षित लोग मिल जाते हैं जो देश की आर्थिक प्रगति में ठोस योगदान करते हैं.

पिछले लगभग तीन दशकों में क़रीब छह लाख 30 हज़ार चीनी छात्र और विशेषज्ञ विदेशों में शिक्षा हासिल करके चीन लौटे हैं जिनमें से लगभग 20 प्रतिशत सिर्फ़ एक वर्ष 2010 में ही थे.

ऐसे विदेशों में शिक्षित बहुत से लोग अब चीन में शोध और विकास क्षेत्रों में सेवारत और कार्यरत हैं जिनकी बदौलत चीन की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता तेज़ी से बढ़ रही है.