चीन सबसे अच्छा मित्र: गिलानी

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Image caption पाकिस्तान और चीन के बीच व्यापारिक संबंध भी पिछले कुछ समय में तेज़ी से बढ़ा है

चीन और पाकिस्तान के कूटनीतिक संबंधों की साठ वर्ष पूरे हो जाने के अवसर पर प्रधानमंत्री युसूफ़ रज़ा गिलानी चार दिन की यात्रा पर चीन पहुँचे हैं.

इस अवसर पर उन्होंने चीन को पाकिस्तान का 'सबसे अच्छा मित्र' बताया है.

हालांकि इस यात्रा की योजना बहुत पहले बन चुकी थी लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान के लिए यह यात्रा एक अवसर की तरह है क्योंकि ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद अमरीका के साथ उसके रिश्ते तल्ख़ हो गए हैं.

वैसे चीन पाकिस्तान का सबसे अच्छा सहयोगी और व्यावसायिक साझेदार है.

कूटनीतिक संबंध

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार गिलानी ने कहा, "हम इस बात को समझते हैं कि सबसे कठिन परिस्थितियों में भी चीन पाकिस्तान के साथ रहा है. इसलिए हम चीन को सच्चा मित्र और हर समय-काल का मित्र कहते हैं."

एजेंसी के अनुसार उन्होंने कहा, "हमें इस बात पर गर्व है कि चीन हमारे सबसे अच्छे और सबसे विश्वसनीय मित्र के रुप में हमारे साथ है और पाकिस्तान हमेशा चीन के साथ रहेगा."

बीबीसी संवाददाता जिल मैकगिवरिंग का कहना है कि चीन के सहयोग के लिए पाकिस्तानी गर्मजोशी का हाल के दिनों में ये सबसे ताज़ा उदाहरण है.

प्रधानमंत्री युसूफ़ रज़ा गिलानी का पहला पड़ाव शंघाई है. बुधवार को वे पूर्वी शहर सुझोउ में एक सांस्कृतिक फ़ोरम को संबोधित करेंगे.

इसके बाद वे बीजिंग जाएंगे जहाँ उनकी मुलाक़ात चीनी नेताओं से होगी जिनमें राष्ट्रपति हू जिंताओ और प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ शामिल हैं.

इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते होने हैं और वे चरमपंथ से निपटने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे.

इस बीच दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और पिछले साल ये 8.6 अरब डॉलर तक जा पहुँचा है, जो वर्ष 2009 की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है.

समझा जाता है कि चीन अब पाकिस्तान के लिए सबसे अधिक सैन्य सामग्री आपूर्ति करने वाला देश है.

वह पाकिस्तान को ज़मीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल और लड़ाकू विमान दे रहा है.

पिछले हफ़्ते ही पाकिस्तान ने पंजाब में एक नया परमाणु संयंत्र शुरु किया है जो चीन के सहयोग से बना है. वहाँ अभी कम से कम दो और ऐसे संयंत्रों का निर्माण होना है.

सरकारी मीडिया ने संकेत दिए हैं कि इस अवसर को चीन चाहेगा कि वह प्रधानमंत्री गिलानी के ज़रिए ये दिखा सके कि वह अमरीका के विपरीत एक स्थाई और विश्वसनीय साझेदार है.

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