भूटान के तंबाकू क़ानून की आलोचना

भूटान का एक मठ इमेज कॉपीरइट BBC World Service

भूटान में विपक्ष के नेता शेरिंग टोब्गे ने देश में कड़े धूम्रपान विरोधी क़ानूनों की समीक्षा किए जाने की माँग की है.

उन्होंने भूटान में तीन और लोगों को अघोषित सिगरेट रखने के लिए जेल भेजे जाने की घटना के बाद ये माँग की है.

भूटान में 2005 में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दिया गया था और इसके इस्तेमाल पर भी कड़ाई बरती जाती है.

भूटानवासी हर महीने 200 सिगरेट या 150 ग्राम तंबाकू ला सकते हैं. भारत से होनेवाले आयात पर 100 प्रतिशत और विदेशों से आयात पर 200 प्रतिशत कर लगाया जाता है.

पिछले वर्ष तंबाकू की तस्करी पर रोक लगाने के लिए इसका इस्तेमाल करनेवालों को कस्टम की रसीदें दिखाना अनिवार्य कर दिया गया.

जेल

मार्च में भूटान में एक भिक्षु को अघोषित चबानेवाला तंबाकू रखने के लिए तीन साल जेल की सज़ा सुनाई गई थी.

उन्हें बिना कस्टम पर घोषित किए हुए भारत से ऐसे 48 पैकेट लाने का दोषी ठहराया गया था.

तंबाकू संबंधी क़ानूनों के उल्लंघन के लिए भूटान में किसी को सज़ा दिए जाने का ये पहला मामला था.

अब भूटान के विपक्षी नेता ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि पारो ज़िले में एक स्थानीय अदालत ने तीन अन्य लोगों को तीन साल जेल की सज़ा सुनाई गई है.

इन लोगों को एक एयरपोर्ट पर अघोषित सिगरेटों के साथ पकड़ा गया था.

विपक्षी नेता शेरिंग टोब्गे ने अपने ब्लॉग पर लिखा है,"मैं तंबाकू नियंत्रण क़ानून को निष्ठुर क़ानून कहता हूँ. ये बिल्कुल पागलपन है".