अमरीका और तालिबान में वार्ता: करज़ई

तालिबान

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि अमरीका तालिबान से बातचीत कर रहा है.

हामिद करज़ई ने कहा है कि 'विदेशी सेना विशेषकर अमरीकी' तालिबान गुट के साथ शांतिवार्ता कर रहे हैं.

पहली बार इतने बड़े किसी अधिकारी ने अमरीका और तालिबान के बीच बातचीत की पुष्टि की है.

इस महीने की शुरुआत में अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने कहा था कि तालिबान के साथ के इस वर्ष के अंत तक राजनीतिक वार्ता हो सकती है.

उल्लेखनीय है कि अमरीकी अगले महीने यानी जुलाई से अपने 97 हज़ार सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान से हटाना शुरु कर देगा.

अमरीका का लक्ष्य वर्ष 2014 तक अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा का ज़िम्मा अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को सौंपने का है.

वर्ष 2001 में अमरीकी हमले से पहले तालिबान ही अफ़ग़ानिस्तान पर शासन कर रहे थे.

विवरण नहीं

Image caption हामिद करज़ई तालिबान को राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करने की योजना से सहमत हैं

अफ़ग़ान राष्ट्रपति ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में जब अमरीका और तालिबान के बीच बातचीत का ज़िक्र किया तो उन्होंने इसके कोई विवरण नहीं दिए.

उन्होंने यह नहीं बताया कि तालिबान विद्रोहियों के नेता सीधे अमरीकी अधिकारियों से बात कर रहे हैं या ये बातचीत मध्यस्थों के ज़रिए हो रही है.

तालिबान का अधिकृत रुप से यही शर्त रखते रहे हैं कि पहले विदेशी फ़ौजें अमरीका छोड़ दें फिर वे अफ़ग़ानिस्तान सरकार के साथ वार्ता करेंगे.

इससे पहले दोनों पक्षों के बीच चल रहे संघर्ष के बीच राजनयिकों ने आरंभिक बातचीत के संकेत दिए थे.

बीबीसी के काबुल संवाददाता पॉल वुड का कहना है कि हालांकि हामिद करज़ई ने शांति वार्ता की बात कही है लेकिन हर ओर से आ रही सूचनाओं में यही कहा जा रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में गर्मियों के दिन भीषण संघर्ष में गुज़रने वाले हैं.

सूचनाओं में कहा है कि और ये संघर्ष वाली आख़िरी गर्मियाँ नहीं होंगीं.

संयुक्त राष्ट्र की पहल

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption अमरीका काफ़ी समय से अच्छे तालिबान और बुरे तालिबान की बात करता रहा है

तालिबान के साथ शांति वार्ता की ये ख़बर अफ़ग़ानिस्तान से ऐसे समय में आई है जबकि संयुक्त राष्ट्र ने अल-क़ायदा और तालिबान को अलग-अलग सूचियों में रखने का फ़ैसला किया है.

इसका अर्थ ये है कि अब तक अल-क़ायदा जैसा ही प्रतिबंध झेल रहे तालिबान को रियायत दी जा सकती है. अबतक दोनों संगठनों पर संयुक्त राष्ट्र ने एक ही तरह का प्रतिबंध लगाया हुआ था क्योंकि इन दोनों को एक जैसा ही माना जाता था.

संयुक्त राष्ट्र की नई कारगुज़ारी का उद्देश्य अफ़गानिस्तान की हामिद करज़ई सरकार की तालिबान के साथ सामंजस्य बढ़ाने की नीति को बढ़ावा देना है.

संयु्क्त राष्ट्र का कहना है कि वो तालिबान को ये संदेश भेजना चाहते हैं कि राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने का यह सही समय है.

अधिकारियों का कहना है कि इससे ये भी साफ़ हो जाता है कि सुरक्षा परिषद अफ़गानिस्तान में जारी समझौते की कोशिश का समर्थन करता है.

बातचीत में शामिल होने के लिए तालिबान प्रतिबंधों को ख़त्म किए जाने की माँग करते रहे हैं.

संबंधित समाचार