अफ़गान अनुदान संकट में

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Image caption संकट में है काबुल बैंक

काबुल बैंक में हुए घोटाले से अफ़गानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और अन्य देशों से मिलने वाला अनुदान संकट में घिर गया है..

अफ़गानिस्तान के वित्तमंत्री ने कहा है कि काबुल बैंक को संकट से उबारने के लिए आईएमएफ़ से चल रही बातचीत में उनका सब्र ख़त्म हो रहा है.

आईएमएफ़ ने बैंक को संकट से उबारने की एक योजना को ख़ारिज कर दिया है.

काबुल बैंक पिछले साल लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया था जब पता चला कि वहां बिना किसी गारंटी के धनाढ्य वर्ग के लोगों को करोड़ों डॉलर का कर्ज़ दिया गया.

आईएमएफ़ इन्हीं चिंताओं की वजह से अफ़गानिस्तान के लिए सात करोड़ डॉलर का अनुदान नहीं जारी कर रहा है.

अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अफ़गानिस्तान को अपने सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान में भी मुश्किलें आ सकती हैं.

सरकार काबुल बैंक के ज़रिए ही शिक्षकों, पुलिस, सेना और अन्य सरकारी कर्मचारियों का वेतन देती है.

अधिकारियों ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया है कि अफ़गानिस्तान सरकार को अगले महीने से ही पैसे की कमी का सामना करना पड़ सकता है.

अफ़गानिस्तान में सरकार चलाने का 40 प्रतिशत खर्च अनुदान से आता है और पुनर्निर्माण और विकास कार्यों के लिए तो पूरी तरह से अनुदान पर ही निर्भरता है.

वित्त मंत्री ओमर ज़खिलवाल का कहना है कि आईएमएफ़ के साथ और बातचीत “समय की (ज़खलिवाल के) बर्बादी है.”

ज़खिलवाल का कहना है कि आईएमएफ़ ने अफ़गान संसद से काबुल बैंक में सात करोड़ 30 लाख डॉलर पूरक बजट के तौर पर डालने की मांग की.

लेकिन जब संसद ने इससे इंकार किया तो आईएमएफ़ ने सात करोड़ डॉलर की अनुदान राशि पर रोक लगा दी है.

काबुल में एक पत्रकार सम्मेलन में उनका कहना था, “हम एक ऐसे साझेदार के साथ बात कर रहे हैं जो इस समस्या के हल के लिए राज़ी नहीं है.”

Image caption अगर अनुदान नहीं जारी हुआ तो करज़ई सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

वित्त मंत्रालय ने पिछले हफ़्ते आईएमएफ़ को दो प्रस्ताव भेजे लेकिन राजनयिकों का कहना है कि ये इस बात की गारंटी नहीं लेते कि बैंक आनेवाले दिनों में पैसे का दुरूपयोग नहीं करेगा.

अफ़गान संसद 45 दिनों के ग्रीष्म अवकाश पर है और ज़खिलवाल का कहना है कि इस संकट से निपटने के लिए संसद का सत्र नहीं बुलाया जाएगा.

आईएमएफ़ ने पिछले सितंबर में अपना अनुदान कार्यक्रम स्थगित कर दिया जब काबुल बैंक घोटाला सामने आया. आईएमएफ़ की मुहर के बिना दानकर्ता अपना योगदान नहीं देंगे.

अफ़गान नागरिकों को जब ख़बर मिली थी कि काबुल बैंक सरकारी अधिकारियों, उनके दोस्त रिश्तेदारों को कर्ज़ दे रहा है तो भारी भीड़ उमड़ पड़ी अपना पैसा निकालने के लिए.

उस समय काबुल बैंक को उबारने के लिए केंद्रीय बैंक आगे आया. बैंक पर अभी भी एक अरब डॉलर का कर्ज़ है और ये भी तब जबकि बड़े बड़े दानकर्ता स्पष्ट कर चुके हैं कि वो और अनुदान तब तक नहीं देंगे जब तक कि आईएमएफ़ हरी झंडी नहीं देता.

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