बांग्लादेश: 657 बाग़ी जवानों को कै़द

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बांग्लादेश की एक अदालत ने 2009 की बग़ावत में शामिल होने के लिए देश की सीमा की सुरक्षा के लिए बहाल अर्धसैनिक बल, बार्डर गार्ड बांग्लादेश, के 657 जवानों को जेल की सज़ा सुनाई है.

बीजीआर को बांग्लादेश राइफ़ल्स के नाम से भी जाना जाता है.

कम तंख्वाह और काम-काज की परिस्थिति के विरोध में फ़रवरी 2009 में राजधानी ढाका से शुरू हुए इस विद्रोह में 70 से अधिक लोग मारे गए थे जिनमें ज़्यादातर बार्डर गार्ड के अधिकारी थे.

सरकारी वकील शहनवाज़ टीपू ने कहा कि बांग्लादेश के इतिहास में ऐसा मामला कभी नहीं आया जब इतने लोगों को एक साथ सज़ा सुनाई गई हो.

जज को पूरा फैसला सुनाने में तीन घंटे का समय लगा. सज़ा सुनाए जाते समय सभी अभियुक्त अदालत में मौजूद थे.

अधिकारियों का कहना है कि अबतक इस मामले में तीन हज़ार बाग़ियों को सज़ा सुनाई जा चुकी है.

ढाका के पिलखाना क्षेत्र से शुरू हुआ बार्डर गार्ड का ये विद्रोह बाद में देश के कई हिस्सों में फैल गया था और इसे क़ाबू करने में 30 घंटों से भी अधिक का समय लगा था.

जवानों ने अधिकारियों की हत्या कर उनके शवों को या तो नालों में फेंक दिया था और गढ्ढों मे दबा दिया था.

सरकारी वकील ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि 108 लोगों को सबसे अधिक सात साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई है जबकि 89 लोगों को सिर्फ़ चार महीने की सज़ा भुगतनी होगी.

इस मामले की सुवाई के लिए हुकुमत ने दर्जनों विशेष अदालतें बनाई थी.

हालांकि अभियुक्तों को वकील से सलाह मशविरे की इजाज़त थी लेकिन अदालत के भीतर उन्हें अपना बचाव ख़ुद करना था. न्यायालय के फ़ैसले पर ऊँची अदालत में अपील का हक़ नहीं है.

जिन बाग़ियों पर हत्या, लूट और आगजनी का आरोप है उनकी सुनवाई दीवानी अदालतों में अलग से जारी है. ऐसे मामलों में उन्हें मौत की सज़ा भी सुनाई जा सकती है.

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