कार्यवाहक सरकार का नियम भंग

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Image caption बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना पर आरोप लग रहा है कि वो अगले चुनावों में धांधली करना चाहती हैं.

बांग्लादेश की संसद ने चुनावों के दौरान निष्पक्ष कार्यवाहक सरकार बनाए जाने की परंपरा को खत्म कर दिया है.

बांग्लादेश के संसद के अनुसार जब भी देश में चुनाव हों, एक कार्यवाहक सरकार बनाने का नियम था जो चुनावों की निष्पक्षता तय करता था.

अब इस नियम को संसद ने बदल दिया है. सांसदों ने इस मामले में वोट डालकर नियम को ख़त्म कर दिया है. अब जो भी सरकार सत्ता में होगी वो चुनावों के दौरान भी सत्ता में रह सकेगी.

हालांकि विपक्ष के सांसदों ने इस मुद्दे पर हुई बैठक का विरोध किया था और वोटिंग के दौरान उपस्थित नहीं थे.

विपक्ष का कहना है कि इस नियम को ख़त्म करने से सत्तारुढ़ सरकार 2014 में होने वाले चुनावों में धांधली कर सकती हैं.

बांग्लादेश में इस समय प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार में है. प्रधानमंत्री ने विपक्ष के इन आरोपों का खंडन किया है.

1996 के बाद बांगलादेश के प्रधानमंत्री चुनावों से पहले सत्ता कार्यवाहक सरकार को सौंप देते थे और कार्यवाहक सरकार की अगुआई रिटार्यड जज के हाथ में होती थी.

कार्यवाहक सरकार के नेतृत्व में चुनाव संपन्न होते थे और यही सरकार चुनावों की निष्पक्षता तय करती थी.

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