बुश के ख़िलाफ़ मुक़दमे की मांग

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Image caption ओबामा प्रशासन पर मानावाधिकार संगठन का दबाव

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि राष्ट्रपति ओबामा को बुश प्रशासन के उन सदस्यों के ख़िलाफ़ आपराधिक जांच के आदेश देने चाहिए जिन्होंने लोगों को प्रताड़ित किया है.

संगठन का कहना है इन लोगों के ख़िलाफ़ यातनाओं के अभूतपूर्व साक्ष्य मौजूद हैं.

बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता गौर्डन कोरेरा के अनुसार संगठन ने 107 पन्नों की अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि उनके पास राष्ट्रपति बुश और उनके प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के ख़िलाफ़ वैसी सूचनाए मौजूद हैं जिससे ये पता चलता है कि उन्होंने यातना के आदेश दिए थे.

उदाहरण के तौर पर सीआईए के जेलों में बिना मुकदमा दायर किए बंदियों को रखना और फिर उन्हें वैसे देशों में भेज देना जहां उन्हें प्रताड़ित किया गया.

वैसे ओबामा प्रशासन ने सीआईए की हिरासत में दो लोगों की मौत के जांच के आदेश पहले ही दे दिए हैं. साथ ही कई ऐसे अधिकारियो की भी जांच हो रही है जिन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश दे दिए थे.

साख

Image caption संगठन का कहना है बुश प्रशासन के उन आधिकारिक आदेशों की भी जांच हो जिनके आधार पर बंदियों से दुर्व्यवहार को जायज़ ठहराया गया था.

हालांकि ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि इस जांच में उन कार्रवाइयों पर उंगली नहीं उठेगी जो कि बुश प्रशासन के तहत जायज़ ठहराए गए थे.

संगठन की दलील है कि आपराधिक जांच में उन मेमो या आधिकारिक आदेशों को भी शामिल किया जाना चाहिए जिसकी मदद से बंदियों के साथ हुए दुर्व्यवहार को उचित ठहराया गया था.

राष्ट्रपति बुश और दूसरे अधिकारियों ने हमेशा ही इस आधार पर अपना बचाव करने की कोशिश की है कि उन्होंने जो आदेश दिए वो ग़ैर क़ानूनी नहीं थे और भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने के लिहाज़ से महत्वपूर्ण भी थे.

संगठन का दावा है कि अगर इन बातों की जांच नहीं हुई तो इससे अमरीका की साख को धक्का पंहुचेगा.

साथ ही अमरीका के पास लीबिया और श्रीलंका में मानवाधिकार हनन की गुहार लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रहेगा.

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