'तालिबान ने की करज़ई के भाई की हत्या'

अहमद वली करज़ई पर पहले भी कई बार जानलेवा हमले हुए हैं.

अफ़गानिस्तान में राष्ट्रपति हामिद करज़ई के सौतेले भाई अहमद वली करज़ई की गोली मारकर हत्या कर दी गई है.

उनकी हत्या लंबे समय से काम कर रहे उनके सुरक्षा प्रमुख ने की. तालिबान ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

हामिद करज़ई के छोटे भाई अहमद वली करज़ई कंधार प्रांतीय परिषद के प्रमुख थे और उन्हें एक बेहद क़द्दावर नेता माना जाता था.

अपने भाई की हत्या पर अफ़सोस जताते हुए राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि सभी अफ़गान परिवार ऐसी पीड़ा और विपदा से जूझ रहे हैं.

राष्ट्रपति हामिद करज़ई अफ़गानिस्तान के दौरे पर आए फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा, "मेरा छोटा भाई आज सुबह अपने घर में शहीद हो गया. यही अफ़गानिस्तान में रहने वाले लोगों की ज़िंदगी है. मैं दुआ करता हूं कि अफ़गानिस्तान में फिर अमन और सुरक्षा का माहौल लौटे ताकि हमारी जनता के दुखों का अंत हो."

अमरीका से अच्छे संबंध

मेरा छोटा भाई आज सुबह अपने घर में शहीद हो गया. यही अफ़गानिस्तान में रहने वाले लोगों की ज़िन्दगी है. मैं दुआ करता हूं कि अफ़गानिस्तान में फिर अमन और सुरक्षा का माहौल लौटे ताकि हमारी जनता के दुखों का अंत हो.

हामिद करज़ई, राष्ट्रपति, अफ़गानिस्तान

अफ़गानिस्तान में तैनात अंतरराष्ट्रीय सेनाओं ने अहमद वली करज़ई की हत्या पर अफसोस ज़ाहिर किया है.

एक विवादास्पद क़बायली नेता अहमद वली करज़ई को पख़्तून समुदाय के लोगों का हिमायती माना जाता था.

हालांकि उन पर नशीले पदार्थों की तस्करी और भ्रष्टाचार में लिप्त रहने के आरोप भी लगते रहे हैं. राष्ट्रपति करज़ई और अहमद वली करज़ई ने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है.

अहमद वली करज़ई को अमरीका और उसके सहयोगी देशों का बड़ा हिमायती माना जाता था. काबुल में बीबीसी संवाददाता क्वेंटिन सोमरविल के मुताबिक़ ये संबंध इतने गहरे थे कि अहमद वली करज़ई पर लगे तस्करी के आरोपों की भी अनदेखी की जाती थी.

सोमरविल के मुताबिक़ दक्षिण अफ़गानिस्तान में अहमद वली करज़ई का काफ़ी दबदबा था. जहां उन्होंने तालिबान के ख़िलाफ नेटो की सेनाओं की मदद भी की.

कई जानलेवा हमले

वर्ष 1961 में जन्मे अहमद वली करज़ई पर पहले भी कई बार जानलेवा हमले हुए हैं. वर्ष 2009 में काबुल के रास्ते में उनपर रॉकेट और मशीनगन से हमला किया गया, लेकिन वो इससे बच निकले थे.

इससे पहले वर्ष 2008 में जब वो एक सरकारी इमारत में बैठक कर रहे थे, बम से भरा एक टैंकर फटा. इस हमले में करज़ई तो बच निकले लेकिन छह लोग मारे गए और 40 घायल हो गए थे.

अन्य सरकारी अधिकारियों समेत अहमद वली करज़ई ने भी इस हमले के लिए तालिबानी चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया था.

वर्ष 2003 में कंधार में अहमद वली करज़ई के घर के पास धमाका हुआ था. लेकिन तब करज़ई ने इसे हथियारों के लाने-ले जाने के समय हुई महज़ एक दुर्घटना करार दिया था.

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