श्रीलंका सरकार ने मानी नागिरकों को 'क्षति' की बात

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Image caption एलटीटीई के ख़िलाफ़ लड़ाई पर रिपोर्ट रक्षा सचिव गोतबाया राजपक्षे ने जारी की.

श्रीलंका ने कहा है कि साल 2009 में तमिल टाईगर्स के ख़िलाफ़ हुई आख़िरी लड़ाई के दौरान नागरिकों को पूरी तरह से क्षति से बचा पाना नामुमकिन था, लेकिन सेना ने सिर्फ़ उतने ही बल प्रयोग किया जितना कि हथियारों से अच्छी तरह से लैस दुश्मन को हराने के लिए ज़रूरी था.

ये बयान उस रिपोर्ट - 'मानवतावादी ऑपरेशन - तथ्यों की परख', का हिस्सा है जो श्रीलंका की हुकूमत ने युद्ध पर अपना पक्ष रखने के लिए तैयार करवाई है और जिसे सोमवार के दिन रक्षा सचिव गोतबाया राजपक्षे ने जारी किया.

साल 2009 के आख़िरी महीनों में हुई लड़ाई के बाद ये दूसरी बार है जबकि श्रीलंका की सरकार ने माना है कि लिब्रेशन टाईगर्स ऑफ़ तमिल ईलम यानि एलटीटीई के ख़िलाफ़ हमले में आम नागिरक मारे गए थे.

एलटीटीई के ख़िलाफ़ 25 साल चली लंबी लड़ाई के 2006 (जुलाई) से 2009 (मई) के तीन साल के दौर पर रोशनी डालती हुई रिपोर्ट में कहा गया है, "आम लोगों की ज़िंदगी को ख़तरे में डालनेवाले एक क्रूर शत्रु के विरूद्ध इतनी बड़ी लड़ाई में आम शहरियों को नुक़सान ये बचा पाना मुश्किल था."

हालांकि श्रीलंका की सरकार बार बार "नागरिकों को शून्य क्षति नीति" की बात दुहराती रही है, राजपक्षे ने फ़रवरी 2009 में समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा था, "कुछ नागिरकों को नुक़सान हो सकता है, लेकिन ऐसा बड़े पैमाने पर नहीं हो सकता."

युद्द की समाप्ति के बाद लड़ाई के दौरान मानवधिकार के उलंघन को लेकर श्रीलंका सरकार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी निंदा हुई है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट ने इस मामले पर कई सवाल खड़े किए हैं. हाल में एक ब्रिटिश टीवी चैनेल ने भी एक वृत चित्र दिखाया है जिसमें दावा किया गया है कि एलटीटीई के ख़िलाफ़ हमले के आख़िरी दिनों में श्रीलंका की सेना ने भारी ज़ुल्म किए थे.

हुकुमत ने इन सभी आरोपों से इंकार किया था.

माना जा रहा है कि श्रीलंका सरकार की जारी अपनी रिपोर्ट उन सभी का जवाब देने के लिए तैयार की गई है.

'विशेष प्रशिक्षण'

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि नागरिकों को नुक़सान से बचाने के लिए किस तरह के क़दम उठाए गए थे जिसमें अग़वा लोगों को छुड़ाने की ट्रेनिंग का विशेष ज़िक्र है.

Image caption विडियो फ़िल्म का एक दृश्य जिसमें दावा किया गया है कि सेना ने तमिलों की हत्या की.

ये भी दावा किया गया है कि फ़ौज के दो लाख लोगों को मानवधिकार क़ानूनों के बारे में प्रशिक्षित किया गया था.

रिपोर्ट में इस आरोप पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया गया है कि सेना ने अस्पतालों पर हमले किए थे लेकिन कहा गया है कि एलटीटीई ने वैसी जगहों जैसे अस्पतालों से हमले किए जो युद्द क्षेत्र के बाहर माने जाते हैं.

गोस्ताबाया राजपक्षे राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार के पास सैटेलाइट से लिए गए सबूत मौजूद हैं कि सेना ने जान बूझकर अस्पतालों पर हमले नहीं किए. हालांकि मानवधिकार संस्थाओं का कहना है कि अस्पतालों नष्ट हुए थे लेकिन वो ये नहीं कह पा रहे कि क्या ऐसा जानबूझकर किया गया था.

श्रीलंका पर अमरीका, ब्रिटेन और दूसरे देशों से दबाव है कि वो युद्ध अपराधों की जांच करे. संयुक्त राष्ट्र ने एक अंतरराष्ट्रीय जांच की बात कही है.

कई तमिल संगठनों ने दावा किया है कि लड़ाई के आख़िरी महीनों में 40,000 आम नागिरक मारे गए थे. संयुक्त राष्ट्र ने सात हज़ार के उस दावे को भी मानने से मना कर दिया था जो सरकार के अपने आंकड़े के नाम पर कहीं से प्रेस में लीक हुए थे.

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