श्रीलंकाई तमिलों में क्रिकेट का ख़ुमार

उत्तरी श्रीलंका में क्रिकेट का ख़ुमार(फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption उभरते हुए बल्लेबाज़ एडवर्ड एडिन गृह युद्घ को एक बुरे स्वप्न की तरह भुला देन चाहते हैं.

श्रीलंका में गृह युद्घ की समाप्ति के बाद उत्तरी श्रीलंका के तमिलों में क्रिकेट के प्रति रूचि बढ़ती जा रही है.

उत्तरी श्रीलंका के जिस मैदान में पहले 'हीरोज़ डे' के दिन एलटीटीई के पूर्व प्रमुख प्रभाकरण अपना वार्षिक युद्घ भाषण देते थे, उसी मैदान में अब तमिल युवक क्रिकेट खेल रहे हैं और श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहें हैं.

मैदान के एक कोने में बच्चे फ़ील्डिंग की प्रैक्टिस कर रहें हैं तो उसी मैदान के एक कोने में दूसरे 25 तमिल युवक बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी का प्रशिक्षण ले रहें हैं.

एक समय था जब यहीं तमिल युवक प्रभाकरण को सुनते थे, वहीं आज श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ रवींद्र पुष्पकुमारा सबके आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.

सभी उभरते क्रिकेट खिलाड़ी बहुत ध्यानपूर्वक पुष्पकुमारा से गेंदबाज़ी के गुर सिख रहें हैं.

वर्ष 2009 में गृह युद्घ की समाप्ति के बाद श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष ने बहुत सारे कोच को देश के उत्तरी इलाक़े में क्रिकेट का प्रशिक्षण देने के लिए निमंत्रण दिया था. लेकिन उनमें से ज़्यादातर लोगों ने ये कहते हुए उनकी पेशकश को ठुकरा दिया था कि देश का उत्तरी इलाक़ा राजधानी कोलंबो से बहुत दूर है.

निमंत्रण

लेकिन पूर्व तेज़ गेदबाज़ रवींद्र पुष्पकुमारा ने क्रिकेट बोर्ड के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया.

पुष्पकुमारा ने कहा, ''मैने सोचा कि बेहतर ये है कि उनलोगों की जाकर मदद की जाए क्योंकि उनलोगों को सिर्फ़ क्रिकेट की ही नहीं और बुहत सी चिज़ों की ज़रूरत है.''

पुष्पकुमारा ने आगे कहा, ''हमे इन बच्चों को मौक़ा देना चाहिए. तीस साल से चल रहा गृह युद्घ समाप्त हो गया है लेकिन यहां के लोगों ने उस दौरान बहुत तकलीफ़े सही हैं. इस दौरान उन्होंने किसी खेल का भी आनंद नहीं लिया. वो सिर्फ़ घर से स्कूल गए और स्कूल से घर. उनकी जीवन में संतुलन नही था.''

'प्रतिभा की खोज'

पुष्पकुमारा का काम सिर्फ़ उभरते हुए क्रिकेटरों को प्रशिक्षण देना नहीं है बल्कि उन युवाओं में छिपी हुई प्रतिभा को भी खोज निकालना है.

पुष्पकुमारा ने कहा कि युद्घ के दौरान की मुश्किलों ने उन्हें क्रिकेट के लिए फ़िट बना दिया है.

Image caption पौन्नुचामी पंगुजन जल्द ही श्रीलंकाई टीम के लिए खेलना चाहते हैं.

उनके अनुसार कई लड़के रोज़ाना पांच से दस किलोमीटर पैदल चलते हैं या साइकिल चलाते हैं. पुष्पकुमारा ने कहा कि 50 और 60 के दशक में उत्तरी श्रीलंका में कई बेहतरीन क्रिकेटर पैदा हुए थे.

उनके अनुसार ख़ासकर तेज़ गेंदबाज़ी की तो यहां एक पूरी परंपरा है जिसे ये युवा आगे बढ़ा रहें हैं. पुष्पकुमारा उनमें से कई लड़को को कोलंबो ले जा चुके हैं और वे क्लब के स्तर पर और अंडर-19 की राष्ट्रीय टीम के साथ मैच भी खेल चुके हैं.

पुष्पकुमारा के अनुसार उनमें से सबसे ज़्यादा प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ एडवर्ड एडिन है.

किलिनोची के 19 वर्षीय एडिन को 2008-09 में अपने परिवार समेत घर छोड़कर भागना पड़ा था.

लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल गए हैं.

अभ्यास

एडिन कहते हैं कि अब वह क्रिकेट खेलने के लिए देश में कही भी जा सकते हैं. उसी तरह 18 वर्षीय स्पिन गेंदबाज़ पौन्नुचामी पंगुजन उत्तरी प्रांत की अंडर-19 टीम के कप्तान हैं.

पंगुजन कहते हैं, ''युद्घ के दौरान हालात बहुत ख़राब थे. हमलोग अभ्यास करने के लिए कही नहीं जा सकते थे क्योंकि सारे रास्ते बंद थे. लेकिन अब हम लोग दूसरी जगहों पर जाते हैं और रोज़ाना अभ्यास करते हैं.''

उत्तरी श्रीलंका में रहने वाले लगभग सारे लोग तमिल हैं, इसलिए इस इलाक़े में क्रिकेट की कोचिंग से तमिल क्रिकेटरों को आगे बढ़ने का मौक़ा मिलेगा. हालाँकि रवींद्र पुष्पकुमारा इसे जाति के तौर पर नहीं देखना चाहते हैं, उनका मानना है कि वो केवल प्रतिभा को ही आधार मानते हैं.

मैंने पंगुजन से पूछा कि उनकी क्या ख़्वाहिश है.

पंगुजन का जवाब था कि वे श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम में खेलना चाहते हैं. शायद अगले साल.

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