गीत-संगीत ने मिटाई दूरियाँ

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Image caption स्थानीय और पूर्व माओवादी घुल-मिल गए हैं

नेपाल में एक ख़ास लोक गीत कार्यक्रम शांति के लिए दोहोरी ने सैनिक छावनियों में रहने वाले पूर्व माओवादी विद्रोहियों और स्थानीय लोगों को क़रीब ला दिया है.

ये लोक गीत कार्यक्रम नेपाल की सात प्रमुख सैनिक छावनियों के निकट चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम का इतना अच्छा असर हुआ है कि पूर्व माओवादी विद्रोही स्थानीय लोगों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर नाच-गा रहे हैं.

नेपाल के ये पूर्व माओवादी विद्रोही देश के सुरक्षाबलों में शामिल किए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं या यों कहें कि इनके पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है.

लेकिन हाल के समय में इनकी चर्चा सिर्फ़ गलत कारणों से हो रही थी. स्थानीय लोगों के साथ इनकी तकरार और लड़ाई-झगड़ों ने काफ़ी सुर्ख़ियाँ बटोरी थी.

खटास

कई सैनिक छावनियों के निकट घटी ऐसी घटनाओं के कारण पूर्व माओवादी विद्रोहियों और स्थानीय लोगों के रिश्तों में खटास आ गई थी.

पिछले सप्ताह बीबीसी नेपाली सेवा के ईश्वर जोशी ने दक्षिणी नवलपरासी ज़िले के अरुणखोला में लोक संगीत कार्यक्रम 'शांति के लिए दोहोरी' को देखा.

वहाँ उन्होंने देखा कि पूर्व माओवादी स्थानीय लोगों के साथ घुल-मिलकर दोहोरी गीत गा रहे हैं और इसकी धुन पर नाच भी रहे हैं. इस कार्यक्रम को नेपाल की सात प्रमुख सैनिक छावनियों में आयोजित कराया जा रहा है.

इस विशेष कार्यक्रम के पीछे असल योगदान एक ग़ैर सरकारी संगठन सहमति का है, जिनकी कोशिश से ये अनोखी पहल हुई. ये सब ऐसे समय हो रहा है, जब नेपाल के राजनेता पूर्व माओवादियों को सुरक्षाबलों में शामिल करने को लेकर समझौते के लिए बातचीत में व्यस्त हैं.

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