तालिबान शांति का हिस्सा बने वर्ना हमले झेले: हिलेरी

Image caption हिलेरी क्लिंटन अफ़गानिस्तान की अघोषित यात्रा पर पहुंची थी.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि अफ़गानिस्तान के शांतिपूर्ण भविष्य से जुड़ी किसी भी योजना में पाकिस्तान का होना ज़रुरी है.

हिलेरी का कहना था, ‘‘ पाकिस्तान का इस पूरी प्रक्रिया में जुड़ा होने से मेरा तात्पर्य यह है कि उनके देश में जो आतंकवादी हैं उन्हें खत्म किया जाए और उन्हें भी जो सीमा पार कर अफ़गानिस्तान में लोगों की हत्याएं कर रहे हैं.’’

अफ़गानिस्तान की यात्रा पर आई हिलेरी क्लिंटन अपने आला अधिकारियों के साथ पाकिस्तान भी जा रही हैं.

उनका कहना था, ‘‘ हम पाकिस्तान पर भी पूरा दबाव डालने का इरादा रखते हैं.’’

हिलेरी ने कहा, ‘‘ हम चाहेंगे कि पाकिस्तान नेतृत्व की भूमिका में आए क्योंकि जो आतंकवादी पाकिस्तान के बाहर हैं वो पाकिस्तान के लिए भी खतरा बने हुए हैं और अन्य देशों के लिए भी.’’

हिलेरी ने साफ़ कहा, ‘‘ हमारा संदेश साफ़ है. हम संघर्ष के लिए तैयार हैं. हम बातचीत के लिए तैयार हैं और हम निर्माण के लिए भी तैयार हैं. ...इसमें या तो चरमपंथी मदद कर सकते हैं या बाधा खड़ी कर सकते हैं लेकिन हम रुकने वाले नहीं हैं.’’

उनका कहना था, ‘‘ आतंकवादियों को हिंसा छोड़नी होगी. अल क़ायदा को छोड़ना होगा और अफ़गानिस्तान के नियम कायदे मानने होंगे जिसमें महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार भी शामिल हैं. बातचीत संभव है क्योंकि यह अफ़गानिस्तान और क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी उम्मीद है.’’

काबुल में अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई के साथ बातचीत के बाद हिलेरी ने कहा कि अगर तालिबान शांति के लिए राज़ी नहीं हुआ तो दबाव और बढ़ाया जाएगा.

हिलेरी के साथ सीआईए के प्रमुख डेविड पेट्रियस और चेयरमैन ऑफ ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ जनरल मार्टिन डेम्पसी भी हैं और ये तीनों पाकिस्तान जाने वाले हैं.

अमरीका पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के रिश्ते फिलहाल ख़राब चल रहे हैं.

हिलेरी के साथ बातचीत के दौरान तालिबान के साथ संबंध सुधारने की बात पर करज़ई ने क्षोभ व्यक्त किया क्योंकि पिछले कुछ समय में तालिबान ने अफ़गानिस्तान के कई बड़े नेताओं को निशाना बनाया है.

हिलेरी का कहना था, ‘‘ हम तालिबान पर दबाव बढ़ाने वाले हैं.’’

उन्होंने कहा कि चरमपंथी अफ़गानिस्तान के शांतिपूर्ण भविष्य का एक हिस्सा बन सकते हैं वरना उन्हें और हमलों का सामना करते रहना पड़ेगा.

हिलेरी ने पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान के बीच एक नई भागेदारी की भी अपील की.

अमरीकी अधिकारियों का कहना था कि वो अफ़गानिस्तान के अधिकारियों को ये समझाने की भी कोशिश करेंगे कि अमरीका अफ़गानिस्तान के साथ लंबे समय की दोस्ती चाहता है.

वर्ष 2014 में अमरीकी सेनाएं अफ़गानिस्तान से वापस लौट रही हैं और उसके बाद दोनों देशों के सैनिक संबंधों की रुपरेखा पर भी बातचीत हुई है.

हिलेरी बिना किसी घोषणा के अफ़गानिस्तान की यात्रा पर बुधवार को पहुंची थीं और गुरुवार को पाकिस्तान जाएंगी.

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