श्रीलंका में क्रिकेट स्टेडियम सेना के हवाले

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Image caption आर प्रेमदासा स्टेडियम की ज़िम्मेदारी वायु सेना को सौंपी गई है

श्रीलंका के खेल मंत्रालय ने ये घोषणा की है कि वहाँ के प्रतिष्ठित क्रिकेट स्टेडियमों का रख-रखाव अब सेना करेगी.

देश के क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि उसमें अकेले वहाँ के स्टेडियमों का रख-रखाव करने की क्षमता नहीं है.

इस साल की शुरुआत में जब संयुक्त रुप से क्रिकेट वर्ल्ड कप का आयोजन हुआ था , तभी श्रीलंका में दो नए स्टेडियमों का निर्माण किया गया था.

इसमें से एक स्टेडियम राष्ट्रपति के गृह ज़िले में बना है और दूसरे का पूरी तरह से नवीनीकरण किया गया है.

इन स्टेडियमों के निर्माण और नवीनीकरण में काफ़ी ख़र्चा हुआ है और जो कर्ज़ लिया गया था उसमे से कुछ हिस्सा तो अभी तक चुकाया नहीं जा सका है.

इतना ही नहीं अब क्रिकेट बोर्ड पूरी तरह से कर्ज़ में डूब गया है.

खेल मंत्रालय ने अब ये घोषणा की है कि अब से थलसेना, नौसेना और वायुसेना एक-एक स्टेडियम के काम देखेंगे.

रख-रखाव और सुरक्षा

इस काम के अंतर्गत वे स्टेडियम का रख-रखाव करने के साथ-साथ जिस दिन मैच होंगे, उस दिन सुरक्षा को नियंत्रण करने का ज़िम्मा भी उन्हीं का होगा.

क्रिकेट बोर्ड के सदस्य और पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी सिद्दत वेटिमुनी ने बीबीसी को बताया कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि बोर्ड की आर्थिक स्थिति बहुत ही ख़राब है.

बताया गया है कि क्रिकेट बोर्ड इस क़दर कर्ज़ में डूबा हुआ है कि वे अब तक क्रिकेटरों की कई महीनों की तनख़्वाह भी नहीं दे पाया है.

बोर्ड के नए अध्यक्ष ने अपने पूर्व समकक्ष को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुए उन पर स्टेडियमों पर ज़्यादा ख़र्च करने की आलोचना की है.

लेकिन विपक्षी पार्टी के सांसद हरिन फ़र्नेंडों का कहना है कि इस मामले में सेना के शामिल होने से वे बहुत अचंभित हैं.

उनका कहना था, ''ये सब रक्षा सचिव के कहने पर हो रहा है. सेना यहाँ सब्जियाँ बेचने के साथ-साथ शहर में ढ़ाँचागत निर्माण का काम भी कर रही है. यहाँ सेना हर चीज़ पर कब्ज़ा कर रही है.''

उनका कहना था कि इस चलन से आम नागरिकों की नौकरियों और तनख़्वाह पर असर पड़ रहा है और सेना का भी मनोबल भी प्रभावित हो रहा है.

प्रशसंकों का कहना है कि कई मैदान जो अच्छी तरह से बने हुए है उनको नज़रअंदाज किया जा रहा है.

लेकिन कुछ श्रीलंकाइयों का कहना है कि देश का सैन्यीकरण हो रहा है.

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