तालिबान को सत्ता से हटाए जाने के 10 साल

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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को सत्ता से हटाए जाने के 10 साल पूरे हो गए हैं. 13 नवंबर 2001 को पश्चिमी देशों की मदद से नॉर्थन एलायंस ने राजधानी काबुल पर बिना किसी रुकावट के नियंत्रण कर लिया था.

अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के दूत साइमन गैस ने कहा है कि उसके बाद से कई बड़े सुधार हुए हैं लेकिन बहुत से काम अभी किए जाने बाकी हैं.

तालिबान के सत्ता से जाने के एक दशक बाद काबुल आगे बढ़ा है लेकिन यहाँ बने सुरक्षा नाकों और भारी सुरक्षा इंतज़ामों के रूप में युद्ध का साया शहर पर देखा जा सकता है.

बीबीसी संवादादता ओरला ग्यूरिन के मुताबिक काबुल में ग़रीबी है लेकिन विकास भी हुआ है जैसे ज़्यादातर जगह बिजली रहती है.

नैटो दूत साइमन गैस मानते हैं कि काबुल में काफ़ी बदलाव आया है. वे कहते हैं, “जब आप काबुल में चलते हैं, तो आप देखेंगे कि ये अब चहल-पहल वाला शहर है जहाँ सड़कों पर औरतें देखी जा सकती हैं, लोग अस्पताल तक जा सकते हैं, काबुल में स्कूल हैं जहाँ लड़के और लड़कियाँ दोनों जा सकते हैं. ये दस साल पुराने शहर से काफ़ी अलग है.” लेकिन राजदूत ये भी स्वीकार करते हैं कि कई काम अब तक नहीं हो पाए हैं.

दस साल पहले तालिबान चरमपंथी अपने ठिकाने छोड़ कर ग्रामीण क्षेत्रों में फ़रार हो गए थे और पश्चिमी ताक़तों ने बिना किसी संघर्ष के अफ़ग़ानिस्तान पर नियंत्रण कायम कर लिया था.

संशय का माहौल

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लेकिन कई आलोचकों का कहना है कि तालिबान अब भी काबुल में पुराना कहर वापस ला सकता है.

आने वाले दिनों में अफ़ग़ानिस्तान से गठबंधन सेना हटाई जाएगी. इसे लेकर भी चिंता जताई जा रही है. अमरीका की योजना है कि वो साल 2014 तक अपनी सेना को वापस बुला लेगा और देश की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी स्थानीय फ़ौज को सौंप दी जाएगी.

जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक आम लोगों को उम्मीद थी कि अब तक वहाँ स्थिति काफ़ी सुधर जाएगी.

कई लोग अफ़ग़ानिस्तान में फिर से गृह युद्ध जैसी स्थिति को लेकर आशंकित हैं क्योंकि तालिबान के जाने के दस साल बाद भी अफ़ग़ानिस्तान में शांति नहीं लौटी है.

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